हड़ताल हड़ताल के खेल में सेवा कल्याण धड़ाम
मजबूत लोेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेकतंत्र की हुंकार से थर्राया सर्बकल्याण
वीरेन्द्र शर्मा
17 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म. प्र. के चर्चित शहर शिवपुरी मे जब से हड़ताल हड़ताल का खेल क्या शुरू हुआ कि स्वच्छता सेवा कल्याण चारो कोने चित पढ़े दिखाई देते है । जगह जगह गन्दगी के अम्बार तो मुॅह माॅगे शुल्क पर नसीब सुबिधाये घसिटती नजर आ रही है । यह उस मजबूत लोकतंत्र का ही प्रमाण है जिसमे लोक की आशा आकांक्षाओ का भुर्ता सरेआम हो रहा है मगर अनदेखी के आभाव मे सेवा शफत भले सरेआम रंभा रही हो मगर चुप कराने बाला दिखाई नही दे रहा । जिनके हक का शोषण हो रहा है उनकी पीढ़ा तो जायज है मगर जो मुॅह माॅगे शुल्क या मोटे वेतन पर सेवाये दे सेवा बाधित कर रहै है उनका क्या ? मगर कहते है नकारात्मक सोचना कहना दोनो ही सभ्य समाज मे धूर्तता का सूचक है सो सकारात्मक ही सोचना चाहिए इसलिये सकारात्मक यह है कि जितना चुप रहा जाये वही समाज और लोकतंत्र तथा सेवा कल्याण के हित मे है अब ऐसे मे सर्बकल्याण थर्राये या हड़ताल के रथ पर सबार लोकतंत्र का परचम लहराये इसमे किसी संदेह नही होना चाहिए कि आने बाला समय अवश्य ही सुखदायी होगा ।
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