नैसर्गिक स्वभाव विरूध समृद्ध जीवन असंभव


उदय अस्त जीवन का सत्य है , ज्ञान का प्रकाश अहंम

व्ही. एस. भुल्ले 

9 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


जीवन में समृद्ध जीवन ज्ञान का अभाव ही जीवन का बड़ा संकट सिद्ध होता है कर्म संस्कार उसके जीवन के सारथी मगर जिज्ञासु स्वभाव मानव जीवन , जीवन उत्कंठाओ भोग वृति के चलते उस भाव को छू ही नही पाता जिसे समृद्ध जीवन कहा गया है गहरी लालिमा के साथ उदय कब गहरी लालिमा से पूर्व अस्त हो जाता है जीवन समझ ही नही पाता मगर सत्य से इन्कार नही किया जा सकता उसकी स्वीकारोक्ति है जीवन का सत्य है कर्मभूमि के मैदान मे पुरूषार्थ करता जीवन कब सृजन मार्ग से दूर चला जाता है यह मानव जीवन समझ ही नही पाता । कारण प्रकृति मे सृजन मूल्य सिद्धान्तो से अनभिज्ञ रहना जो ध्यान ज्ञान और कर्मज्ञान से संभव है हर क्षण संज्ञान सूचक से लैस मानव जीवन कब भूल कर जाता है जब तक वह समझ सुन जान पाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । सृस्टि मे मौजूद जीव जगत के संरक्षण का भार कब मानव जीवन के कंधो से कम तर हो जाता है यह वह मेहसूस ही नही कर पाता जबकि प्रकृति में एक ही जीवन ऐसा होता है जिसको प्रकृति ने सबसे उत्कृष्ट सक्षम बनाया है । मगर उसकी जरा सी भूल ने आज उसे एक ऐसे चैराहै पर ला खड़ा किया है जहां आज उसके पास सब कुछ है अगर कुछ नही है तो वह लालिमा मे अस्त होने कि कला , संसाधन उदय होने से लेकर अस्त होने तक के बीच उसे वह ही नसीब पाता है जो वह जिस भाव से सृजन के दौरान संग्रहित करता । सब कुछ हमारे सामने साक्षी है मगर जीवन का मौजूद अनियंत्रित स्वभाव सम्पूर्ण समृद्ध जीवन की बाधा सिद्ध हो रहा है जिसे आज बड़े पैमाने पर समझने सीखने की आवश्यकता है तभी हम सच्चे और अच्छे मानव जगत का अंग बन मानव जीवन को सिद्ध कर उदय होने से लेकर अस्त होने तक समृद्ध रूप से हासिल करने योग्य बन पायेगे इस सच को मानव जीवन जितनी जल्द समझेगा उतना ही वह जीवन में अपनी उपायदेयता सिद्ध करने मे कामयाव होगा जो आज जीवन मे बड़ा सबाल है । जय स्वराज । 


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