भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का भयानक सच
केन्द्रीयकृत व्यवस्था ने छोटे मोटे सेवा , निर्माण, सप्लाई , छपाई उद्योग की निकाली जान
पारदर्शिता के नाम व्यवस्था में पैर पसारता माफिया राज
वीरेन्द्र शर्मा
3 जनवरी 22 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भय , भूख , भ्रष्टाचार मुक्ज व्यवस्था का चेहरा ऐसा किसी ने शायद सपने में सोचा होगा जब यह नारा म.प्र. की पावन धरा पर बुलंद था तब लोगो बड़ी उम्मीद की थी कि उसे अब एक ऐसी व्यवस्था नसीब होने बाली है जिससे वह अपने अमूल्य जीवन का निर्वहन निरविघन ढंग से नई व्यवस्था में कर सकेगे मगर उसे यह इल्म न था कि जो पारदर्शी व्यवस्था जन्म लेने बाली है उसका स्वरूप इतना भयानक होना कि जिन्दा तो जिन्दा मुर्दे भी सरमा जाये । बहरहाॅल हम बात कर रहै है म.प्र. मे सेवा निर्माण , विकास , छपाई , सप्लाई से जुड़े उन छोटे मोटे धन्धे व्यवसाय की जिससे लगभग औपचारिक अनौपचारिक तौर प्रदेश के 10 फीसद लोगो को सीधा तो लगभग 20 फीसद लोगो को अनौपचारिक तौर पर रोजगार मिलता था । मगर आज इस रोजगार के क्षैत्र मे मातम पसरा पढ़ा है । कारण केन्द्रीयकृत व्यवस्था और पारिदर्शिता के नाम परदा पृथा इसमे किसी को संदेह नही होना चाहिए कि आज भी अधिकांश लोग कम्पयूट्रृीकृत हुनर को बहुत अच्छे से नही समझते है जिसके लिये उन्है किसी न किसी का सहारा तो लेना ही पड़ता है सो इटेन्डरिंग की पारिदार्शिता तो स्वतः ही सिद्ध हो जाती है उस पर से सीधे छपाई शामग्री सप्लाई का खेल कौन नही जानता निर्माण के क्षैत्र मे जिस तरह से माफिया राज कायम हो रहा है । वह आज किसी परिचय का मोहताज नही मगर भय भूख भ्रटाचार मुक्त व्यवस्था के नाम यह गोरख धन्धा खूब चल रहा है । कौन नही जानता कि भोपाल से निकलने बाले घोषित अघोषित फरमानो के पीछे का सच क्या है ? कैसै बर्ष भर माल से लदे बाहन जिला विकासखण्ड स्तर पर दौड़ते रहते है । कैसै पावतिया संकलित कि जाती है और आॅखो के सामने ही गरीबो के हक दम तोड़ जाते है कैसै छोटे मोटे कामगारो को बाहर रखने पैकैज तैयार किये जाते है और क्यो घटिया स्तर के निर्माण पर लोग चुप्पी साध सेवा कल्याण का नारा बुलन्द कर अपने अपने कर्तव्यो की इतिश्री कर जाते है सबाल कई है मगर सुनने बाला कौन आज यही सबसे बड़ा सबाल है मगर उत्तर कब मिलेगा यह फिलहाॅल भबिष्य के गर्भ मे है ।
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