सत्ता की लालसा में हदे तोड़ती सियासत


सैलाव से अनभिज्ञ सियासी सरोकार घातक 

अगर विधि , मान्यताये , संस्कार अक्षुण न रहै तो , सत्ता , सियासत भी सुरक्षित नही पायेगी 

निष्ठा के अभाव में बैबस सरोकार  


व्ही. एस. भुल्ले 

8 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

गैंग गिरोबंद सियासत और कम्पियूटर , साॅफटवेयर इन्टेलीजैन्सी के युग मे भले समृद्ध सामथ्र्यशालियो के मसूबे जो भी हो जिसके दो ही पक्ष हो सकते है सर्बकल्याण या फिर स्वकल्याण अब इनका निर्धारण भी आने बाला समय ही कर समता है मगर बर्तमान जो घट रहा है वह सत्ता , सियासत मे उचित नही कहा जायेगा यह भी भबिष्य का ही बिषय हो सकता है । सियासत मे हालिया घमासान से विधि , मान्यता , निष्ठा से जुड़े सरोकारो को लेकर छिड़ा है । जिसमे आरोप प्रत्यारोपो के साथ ही विधि सम्बत वह व्यवस्था भी एक पक्ष है जिसकी समीक्षा एक वड़ी चूक को लेकर होने बाली है । अगर सत्ता शहीद हुई तो सियासत छिड़ना स्वभाविक है अगर विधि का डन्डा नही चला तो यह उन मान्यता विधि का माखौल होगा जिस पर हमारा लोकतांत्रिक आधार टिका है । ये अलग बात है कि अगर विधि का चाबुक चला तो यह उस सत्ता की नंगी पीठ पर प्रहार होगा जिसके पाॅच बर्ष पूर्ण होने के साथ ही दफन कफन की तैयारी है जिसे मानवीय मान्यताओ अनुसार अन्याय अत्याचार करार दे सियासी लाभ उठाने की कोसिश होगी । आने बाले समय मे क्या होगा या नही होगा यह भी भबिष्य के ही गर्भ मे है । मगर सत्ता , सियासत के लिये शुरू हुये संघर्ष ने देश की प्रतिष्ठा का बड़ा नुकसान किया है । यह बात न तो उन सियासी लोगो को भूलना चाहिए न ही उन विधि विशेषज्ञो को जिन्ह चूक पर निष्ठा पूर्वक निर्णय लेना है । मामला बहुॅत ही संबेदन शील है और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा है । जिसके देश सर्बोच्य संस्थाये शोध मे जुट चुकी है देखना होगा इतने अतिसंवेदन शील विषय पर क्या सत्ता , संस्थाये , सियासत क्या निर्णय ले पाती है । जय स्वराज । 


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