विधान त्याग विधि को विकृत कर ब्रम्हाण्ड चलाने का मुगालता
मानवीय भूल का दंश भोगता बर्तमान , भोगेगा भबिष्य
यह मानव को गर्व नही शर्म का बिषय
स्वकल्याण में डूबी आस्थाओ से सर्बकल्याण असंभव
व्ही. एस. भुल्ले
9 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.
सेवा कल्याण या सर्बकल्याण के नाम जिस तरह से स्वकल्याण मे आस्था रखने बालो का कांरबा चल पढ़ा है इसके लिये स्थापित विधान अनुसार ऐसे लोग कभी कसूरबार न ठहराये जाये जो मानवता से उसके कल्याण संरक्षण हर तरह की सुरक्षा की उम्मीद के हक दार अनादि काल से रहै है । जिनकी सेवा कल्याण के नाम लोकशाही की खामियो या लोकशाही से प्राप्त सामथ्र्य शक्ति का लाभ उठा स्वकल्याण मे जुटे गैंग गिरोहबन्द लोग ऐसे धन दानव जो न तो अब विधान मे आस्था मे रखते है न ही उस विधि का सम्मान करते है जिसे हर मानव ने अपने अपने समृृद्ध सुरक्षित जीवन के लिये अंगीकार किया था । अगर यो कहै कि ऐसे मूड़धय स्वकल्याण मे स्थापित होती अघोषित विकृत विधि से समृचुे ब्रम्हाण्ड को चलाने का मुगालता पाल बैठै है तो ऐसे मानव और महामानव बनने को आतुर महानुभावो का भगवान ही मालिक है मगर ऐसे लोग मनुहार के बीच उस विधान के उस दण्ड विधान की भी अनदेखी कर रहै है जिससे कोई अपराध पश्चात कभी स्वयं को सुरक्षित नही रख पाया फिर उस विधान अनुसार उसे इसी जन्म में भोगना पढ़े या अगली कई यौनियो जिसका उसे आज ज्ञान ही नही वह कैसै मानव हो सकता है । अब ऐसे मे मानवीय कृत्यो पर गर्व किया जाये या शर्म मेहसूस की जाये यह चर्चा का बिषय होना चाहिए । मगर जो दंश बर्तमान भोग रहा है अगर अज्ञानता बस मानवीय भूलो का सिलसिला यू ही चलता रहा जिसमे फिलहाॅल कोई सुधार की सम्भावना नही तो निश्चित मानिये यह मानव जीवन की बड़ी भूल ही कही जायेगी जिसेे पश्चाताप का वक्त शायद ही मानव जीवन को कभी मिल सके । जिस बैजान शिक्षा और आत्मा विहीन सत्ताओ का समाज सियासत शिकार है आखिर ऐसे में सुधार की शुरूआत कैसै हो जो सक्षम की मुद्रा मे उन्है ज्ञान नही जो ज्ञान विज्ञान को मंच दे सकते उन्है स्वकल्याण अभियान से फुरसत नही जो समझते है उनकी कोई सुनता नही उनके पास वह सामथ्र्य शक्ति , संख्याबल नही जो लोकशाही को काबू कर उसे लोककल्याण के मार्ग पर ले जा सके । अगर खाना पीना संग्रहण करना और विलासता अहंकार ही जीवन है तो फिर स्थापित विधान का कोई अर्थ नही और विकृत विधि के सहारे ब्रम्हाण्ड चलाने का मुगालता पालने बालो का कोई अपराध नही । सत्य क्या है यह तो उन मानवो को ही तय करना जो मानव जीवन के अर्थ और मानव धर्म मे आस्था रखते है । बड़ी दया और अपराध बोध से ग्रस्त आखिर इस मानव जीवन को कब समृद्ध ज्ञान जीवन प्राप्त होगा यह देखने बाली बात होगी । जय स्वराज ।
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