उ.प्र. - समृद्ध सियासत का महामंथन


गोलबंद होते सामथ्र्यशाली और पुरूषार्थी  

नियती तय करेगी सार्थकता और सफलता 

जरासी चूक खत्म कर सकती है किसी का भी अस्तित्व 

वीरेन्द्र भुल्ले 

14 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

चुनावी घोषणा के साथ जिस तरह से उ.प्र. मे छोड़ने जोड़ने का घमासान छिड़ा है उसे देखकर तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि जैसै समृद्ध सियासत के लिये के महामंथन शिरू हो चुका हो , गोल बन्द होते सियासी सामथ्र्यशाली पुरूषार्थी हर एक यह सुनिश्चित कर लेना चाहता है कि सियासी महामंथन से निकलने बाली बैशकीमती हर बस्तु उसके हिस्से मे हो और मंथन से निकलने बाला सियासी अमृत किसी भी सूरज में उसके हाथो से ओझल न होने पाये ।


जिसमे सियासी दलो का अपना अपना संख्या बल है तो किसी किसी पर अपना अपना गणित तो साथ ही वैचारिक आधार सहित जाति क्षैत्र तथा व्यक्तिगत संख्याबल है अब ऐसे मे अपना अपना अस्तित्व बचाने बालो का भी इन दलो मे खासा दखल है । अगर हम सृजन के अनुशासन टूटने पर हुये मंथन की बात करे तो उस समय के मंथन मे देवता , असुर सभी का योगदान रहा था जैसै की हम कथा कहानियो मे सुनते आये कि दुरभाषा ऋषि के श्राफ से मुक्ति पाने जिस तरह यश ऐश्वर्य विहीन हो चुके देवताओ को असुरो की मदद से मंथन कर पुनः समृद्ध सृजन को प्राप्त किया गया लगता ठीक उसी प्रकार सत्ता भोगने बाले सत्तासीनो की लगातार अनुशासन हीनता के श्राफ से मुक्ति का मार्ग 2022 के सियासी मंथन से निकलने बाला है । अब इसमे कौन असुर कौन देवता सिद्ध होगा यह तो फिलहाॅल नियती तय करेगी मगर इससे पूर्व अगर कोसिश है तो उसको समझने में क्या हर्ज है । इसमे किसी को कोई हर्ज नही होना चाहिए की अब सत्ता की बाजी नियती के हाथो जा चुकी है । और सत्य का सरोकार मौजूद सियासत का साक्षी मगर जो फिलहाॅल श्री के सानिग्ध मे है और जो श्री का सानिग्ध पाना चाहते है ऐसे उन सभी को समझना होगा कि यह इतना आसान नही मगर सियासी स्थति भी कुछ कम विकट नही । अभी तो पूर्ण रूप से छोर ही मंथन मे सुनिश्चित नही कि कौन सामथ्र्यशाली बलशाली किस छोर को पकड़ेगा और किसके हिस्से मे क्या निकला कौन तय करेगा अगर नियती न्याय करेगी तो निश्चित ही वह सत्य के पक्ष मे होगी फिर मंथन मे जिसके हाथ जो लगे । मगर सत्ताभोगियो मे जिस तरह भगदड़ मची है इससे इतना तो तय है कि अभी बाजी मे बहुत कुछ बाकी है । क्योकि इस मंथन से निकलने बाली बैशकीमती सियासत के अमृत मे दो दो दैवियो की भी इस मर्तवा हिस्सेदारी है । सो मंथन इतना आसान नही रहने बाला । अगर ऐसे मे कोरोना कहर बरपा तो मंथन में मेहनत करने बालो को कुछ माह यश ऐश्वर्य से और दूर रहना पढ़े जिसके लिये मंथन से पूर्व ही मारा मारी मची है ।  


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