नवसमाज निर्माण से अनभिज्ञ , धर्म जाति मे उलझा पुरूषार्थ
समृद्ध जीवन मे कंगाली का भूचाल ................तीरंदाज ?
व्ही. एस. भुल्ले
भैया - गर म्हारे को भी कोई वाशिंग मशीन मिली तो मने भी गंगा स्नान कर आउॅगा और सारे पुण्य पाप हाथो हाथ धो मने भी समृद्ध निशकलंक समाज में शामिल हो इसी जीवन में धन्य हो जाउॅगा । और जाति पाति से पीछा छुड़ा धर्म के ही आधार या फिर जीवन पद्धति के आधार पर ही नव समाज निर्माण का भाग बन स्वयं की सात पीढ़ियो को धन धान्य बना जाउॅगा । रहा सबाल कंगाली के भूकंप भूचाल का तो वह भी म्हारा ही नही म्हारी आने बाली पीढ़ियो का कुछ भी नही उखाड़ पायेगा । और आने बाले समय में समय चक्रवति सम्राट का परचम म्हारे बालो का फहरायेगा ।
भैयै - बाबलो की तरह तने यह कै अर्र बर्र बोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी एक तरफ सीत लहर तो दूसरी तरफ औलावृष्टि का कोहराम मचा है । उधर बाबा के राज्य के राज्य मे सत्ता के लिये जबरदस्त तोड़फोड़ का दौर चल रहा है । सुना है पाॅच बर्ष तक सत्ता की मलाई अपनो की भलाई की खातिर फाकने बाले सत्ता का जहाज किनारे पर पहुॅचने से पहले ही डूबने की खबर से पूर्व ही जहाज छोड़ कूदने मे लगे है और फिर किसी नये जहाज की सबारी करने हुकांर भरने लगे है ।
भैया - तो म्हारे को ऐसे लोगो से कै लेना देना मने स्वकल्याण स्वसमृद्धि की खातिर इस सियासी दल दल मे डुबकी लगा रहा हुॅ मेरी आने बाली पीढ़िया तर जाये उसकी पुख्ता व्यवस्था कर रहा हुॅ क्योकि इस कल नही अर्थयुग मे बगैर धन के कुछ हाथ लगने बाला नही न तो सत्ता का साथ न ही ऐश्वर्य यश मिलने बाला है । म्हारे देखते देखते न जाने कितने बैहरूपिये चालाक चापलूस तर गये और अपने अपनो को जमीन से उठा असमान तक ले गये तो फिर मने भी क्यो पीछे रहुॅ और अपने ही पुरूषार्थ को कोसता रहुॅ ।
भैयै - बात तो थारी सौआने सच मगर कै करू जमाना बहुॅत बदल गया है । सेवा कल्याण के क्षैत्र मे भी बड़ा परिबर्तन दिख रहा है । सर्बकल्याण का स्थान अब स्वकल्याण मे निहित हो चुका है इसलिये ही नव समाज निर्माण का दौर चल पढ़ा है । जिसमे अब जाति धर्म की कोई बात न होगी जिसका आचरण व्यवहार समान होगा अब वही हमारी जाति और जीवन पद्धति का आधार होगी ।
भैया - समझ लिया मने थारा इसारा मने भी सब कुछ छोड़ अब नवसमाज का भाग बन जाउॅगा और उगली उठाने बालो को ऐसा सबक सिखाउगा कि वह गिनती ही भूल जाये । बस म्हारे को करना यह है कि कैसै भी हो बस इस कुनबे मे पैर जमाने मे सफल हो जाउ और मौका लगते ही बगैर समय गबांये नये नये फाॅरमूलो के बल धनार्जन की ऐसी इन्डसट्र्ीज लगाउगा कि माॅग भी जबरदस्त हो और सप्लाई भी मदमस्त बस फिर म्हारे को आकंड़े भर देखना है और सेवा कल्याण के रथ पर सबार हो हाथो हाथ चक्रवृति सम्राट बनने का रास्ता रातो रात खोजना है । तब मने भी दृबिड़ आर्य की रेस से बाहर हो जाउगा एक नव समाज का वंशज कहला स्वयं का नाम स्वर्ण अक्षरो मे अंकित कराउगा । जय स्वराज ।
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