ममत्वभरे दुलार की थप्पी से अनाथ सियासत जीवन सरोकार
संस्कार , संवेदनशीलता की पराकाष्ठा तक का जीवन संघर्ष
वीरेन्द्र शर्मा
25 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
आज उस दिव्य भव्य पुण्य आत्मा की पुण्यतिथि जिन्होने राजपथ त्याग लोकपथ को अंगीकार कर सिर्फ सामाजिक सरोकार ही नही सियासत को भी कृतज्ञ किया वह भी निस्वार्थ जिन्है आज हम लोकमाता के नाम से पुकारते है , कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया उस असाधारण व्यक्तित्व और संवेदन शीलता की प्रतिमूर्ति थी जिससे आज सिर्फ सियासत ही नही जीवन सरोकार भी अनाथ नजर आते है । धर्म के प्रति गहरी आस्था नित दिन पूजन भजन और आमजन से आत्मीय सरोकार संकट या समस्या को लेकर अतिसंवेदनशील कै राजमाता विजयाराजे सिंधिया मे संस्कृति संस्कारो को लेकर बैहद गंभीरता अन्याय किसी के भी साथ हो अन्यायी कितना बड़ा क्यो न हो वह सीधे लोहा लेने का सिर्फ दम ही नही उदाहरण भी प्रस्तुत करती रही । बात फिर देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गाॅधी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. डी.पी. मिश्रा की हो या राममन्दिर की रही हो उन्होने संस्कार सिद्धान्तो के एक से बढ़कर एक उदाहरण अपने जीवन में प्रस्तुत किये सार्बजनिक जबाबदेहियो को समर्पित राजमाता ने कभी कर्तव्य निर्वहन के आढ़े स्व को नही आने दिया । उन्होने जितनी संबेदनशीलता के साथ परिवारिक जबाबदेहियो का निर्वहन किया तो उससे चार कदम आगे जाकर सार्बजनिक जीवन की समस्त जबाबदेहियो को पूरा किया और देश को एक से बढ़कर एक नेता दिये मगर कभी स्वयं को कुछ नही चाहा अन्ततः आज के ही दिन वह उस महान कृतक कीर्ति और अपने जीवन की भव्य दिव्य विरासत सियासत और जीवन सरोकार के बीच छोड़ चली गई आज उनकी पुण्यतिथि है । मगर वह हमारे बीच नही यह बात निश्चित ही तह उम्र उन लोगो खलती रहैगी जिनकी आस्था सर्बकल्याण और जीवन सरोकारो की संवेदनशीलता में है । नमन ।
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