सियासी सत्ताओ ने उजाड़ दी कई पीढ़ी



कुसंस्कृति का शिकार होता समृद्ध जीवन  

अहंम अहंकार में डूबा सियासी कांरबा , आज भी लोक समृद्धि और बैजान तंत्र का मोहताज 

वीरेन्द्र शर्मा 

10 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

अगर हम व्यवस्थागत देखे तो 5 बर्ष का र्निधारित समय लोक कल्याण , सेवा , विकास के लिये पर्याप्त माना गया है मगर जो सियासी दल सत्ता साधन , शक्ति संपन्न होने के बाबजूद क्रमशः 45 , 30 बर्ष सत्ता शासन मे रहने के बाबजूद आजादी के लम्बे अन्तराल के बाद एक ऐसे स्थान पर खड़े है । और जिनकी सेवा कल्याण के लिये यह सत्ता शासन मे आये वह आज जन रोजगार , सृजन योग्य संस्कारिक शिक्षा , सहज सस्ती या निशुल्क स्वास्थ सेवा संसाधन , शुद्ध पेयजल , प्रतिभाये पुरूषार्थ संसाधनो की मोहताज है । अब इसके लिये दोषी जो भी करार दिया जाये मगर समृद्ध जीवन से द्रोह करने बाले इस कृत्य के लिये वह जनमानस कतई जबाबदेह नही ठहराया जा सकता जो , अपनी बैबसी , मायूसी , स्वयं के कल्याण के आग्रह के लिये जानी पहचानी जाती है । और जो सत्ता सियासी दलो के भ्रमपूर्ण आचरण व्यवहार का शिकार हो स्वयं की समृद्धि अक्स इन सियासी ताकतो मे तलासती है । मगर स्व कल्याण के आग्रही अहंम , अहंकारी के अज्ञानता पूर्ण कृत्यो ने इस दौरान न जाने कितनी पीढ़ियो का समृद्ध जीवन ठिये ठिकाने लगाने मे जाने अनजाने मे अपना योगदान दिया यह अपने आप मे स्वतः स्पष्ट है । वही अहंम अहंकारी आचरण आज भी लोकसमृद्धि और बैजान तंत्र का मोहताज बना हुआ है । ये अलग बात है कि सत्ता भोगने बालो का कांरबा कोई मोटा नही रहा विगत 70 बर्षो का सियासी पुरूषार्थ गबाह है कि परिणाम लोक , जनकल्याण मे क्या रहै और भबिष्य मे क्या रहने बाले है । ये अलग बात है कि कुसंस्कृति आज भी अपने कृत्य पर शर्मिदा न हो मगर आचरण का अहंकार आज भी वही है जिससे सर्बकल्याण तो दूर कोणी अगर इन अहंम अहंकारी की जुटायी विरासत ही शेष रह जाये तो सेवा कल्याण के लिये बढ़ी बात होगी जिसकी संभावना भी मौजूदा हालात मे नगण्य सी जान पढ़ती है । मगर अनियंत्रित सेवा कल्याण , विकास का यह सियासी आचरण व्यवहार मौजूद पीढ़ी को कहां ले जाकर छोड़ेगा यह देखने बाली बात होगी । जय स्वराज । 


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