जुमलो के खेल से बिलबिलाई जमुहरियत


जीवन को जमीन और जमीर की दरकार 

हारजीत के अखाड़े में तबदील जनतंत्र 

गैंग गिरोहबन्द सियायत में डूबे जीवन सरोकार 


विरासत से बिमुख बर्तमान से भबिष्य को खतरा 

बैलगाम होता , सेवा कल्याण 

वीरेन्द्र भुल्ले 

11 फरबरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

अब इसे समृद्धि सर्बकल्याण का सौभाग्य कहै या दुर्भाग्य जो बैलगाम सेवा कल्याण , जुमलो के खेल , गैग गिरोहबन्द सियासत , हार जीत के दांब और विरासत से बिमुख बर्तमान से जमीन और जमीर सहित भबिष्य तक पर खतरा आ पहॅुचा जिसे अभिभूत आशा अकांक्षाये आज भयभीत है । स्वयं को भागीरथ सिद्ध करने को आतुर इस जनतंत्र का भबिष्य क्या होगा जनतंत्र को अपनी अपनी अकांक्षाओ का अखाड़ा बनाने बाले ही जाने मगर दशा दिशा को लेकर उठते सबालो का हालिया उत्तर भले ही न हो मगर श्रगांरी संस्कृति के उदय ने इतना तो साफ कर दिया कि शायद अब मौजूद सियासत में समृद्ध संस्कारिक संस्कारो का कोई स्थान नही न उस महान भव्य दिव्य विरासत का जो कभी हमारा गौरव गर्व हुआ करते थे और जो भारत बर्ष की पहचान रहै है । मगर आज सर्बकल्याण के नाम सब कुछ चल रहा है । सत्ता के लिये सियासत न तो स्थापित विधान विधि मे आस्था रखने तैयार है न ही उन जीवन आधार , सरोकारो का सम्मान करना चाहती है जो समृद्ध खुशहाॅल जीवन , सेवा कल्याण के आधार है । सृजन सिद्धान्त को आयना दिखाने बाले भूल रहै है कि इससे पूर्व भी हजारो सेकड़ो बर्ष पूर्व बड़ी बड़ी बलशाली बिस्तार बादी अताताई सत्ता रही है । जिन्हो स्व स्वार्थ के लिये जुल्मो की इन्तिहा और अत्याचारो की पराकाष्ठा की मगर उन्है हासिल किया हुआ वह कुछ गबांना पढ़ा जिसे वह अपना सामथ्र्य पुरूषार्थ सेवा कल्याण समझते थे । और बर्तमान मे उनका प्रमाणिक नामोनिशान नही है यह सत्य है । मगर कहते है न उम्मीद होना ठीक नही इसलिये जीवन की सार्थकता पर विचार अवश्य होना चाहिए उन सिद्धान्त , संस्कृति , संस्कार पर चर्चा अवश्य होनी चाहिए उन चरित्रो पर गर्व होना चाहिए जिन्होने अपने बचपन यौवन भव्य दिव्य जीवन की परवाह किये बगैर सर्बकल्याण मे अपना योगदान दिया और कुछ है जो आज भी दे रहै है । ऐसी विभूतियो का सम्मान होना चाहिए उनसे सीखना चाहिए कि जीवन और सर्बकल्याण के मायने क्या है अगर आज कि सियासत यह कर पायी तो यह उसका इस जनतंत्र के लिये ही नही उन आशा अकांक्षाओ के लिये बड़ा योगदान होगा जिनकी न जाने कितनी पीढ़िया सिर्फ इस उम्मीद में इस दुनिया से बिदा ले गई कि उनकी आने बाली पीढ़ी तो कम से कम समृद्ध खुशहाॅल जीवन की साक्षी हो उसे मेहसूस कर सकेगी । शायद इस सच को आज की सियासत और हम समझ पाये तो मानव जीवन के लिये उसका सबसे बड़ा योगदान होगा । 

 

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