जोखिम से जूझता जनतंत्र
श्रेष्ठ संस्कार बन सकते है समृद्ध भबिष्य के सारथी
नीति नियती के संग्राम मे राजधर्म की दरकार
वीरेन्द्र शर्मा
13 फरबरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
देश के 5 राज्यो मे चल रहै चुनाव के परिणाम जो भी रहै मगर जब नये निजाम के लिये नीत नियत को लेकर जो संघर्ष छिड़ा है वह बड़ा ही जोखिम पूर्ण लगता है । मगर ऐसे में श्रेष्ठ संस्कारो से ही उम्मीद की जा सकती है जो शायद समृद्ध भबिष्य के सारथी सिद्ध हो । मगर यह तभी संभव है जब राजधर्म का पालन हो जब आज हम लोकतंत्र मे है और नये निजाम को अगले 5 बर्ष के लिये चुने जाने का सारा दारामोदार आम जनता पर है और वह इस लोकतांत्रिक व्यवस्था की राजा भी तो राजधर्म की जबाबदेही भी जनता की ही होती है । अगर नियती आढ़े नही रही तो निश्चित ही नीति का परचम फहराना स्वभाविक है । मगर यह इतना आसान नही मौजूदा लोकतंत्र मे मगर जोखिम से इन्कार नही किया जा सकता । ये अलग बात है कि 5 राज्यो मे सबसे अधिक निगाहै देशभर की उ.प्र. पर टिकी हुई है और यहां संग्राम भी जबरदस्त है । जहां सिर्फ एक दो नही कई दल अपना अपना भाग्य सेवा कल्याण के लिये आजमा रहै है । जीत के लिये बिछी बिसात पर कामयाब कौन होगा किसको कितनी सफलता मिलेगी यह तो 10 मार्च को तय होगा मगर जीत के लिये जिस तरह से नीति और नीयत की फजीहत सरेराह हो रही है वह चिन्ता मे डालने बाली हो सकती है । ऐसे मे उम्मीद की जा सकती है इतिहास से सीख अवश्य ली जाये और श्रेष्ठजन इसमे अपना योगदान अवश्य करे जिससे एक अच्छा और सर्बकल्याणकारी निजाम सिर्फ उ.प्र. ही नही अन्य राज्यो के लिये भी मिल सके ।
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