अखाड़े चमकाते जंगजू ...........? तीरंदाज


अधिकार उन्मुख व्यवस्था सर्बकल्याण की बड़ी बाधा 

व्ही. एस. भुल्ले 


16 फरबरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

भैया - अखाड़े चमकाते चुनावी जंग जुओ और गुजरते लावो लश्करो को देख म्हारा तो कलेजा बैठा जा रहा है नगाड़ो की थाप और जय विजय के जय कारो के बीच , कै वाक्य मे ही म्हारे जैसै लोगो का कल्याण होगा और खोया हुआ वह सम्मान , स्वाभिमान , समृद्ध जीवन म्हारे जैसै सस्ते राशन पानी बालो  को हासिल होगा । मने न लागे कि ऐसा कुछ होने बाला है क्योकि विगत 70 बर्षो से हर 5 बर्ष में चुनाव ही तो हो रहै है । और दलो के रूप में नये नये अखाड़े ही तो बन रहै है । जो एक दूसरे को चुनावी जंग मे जंगजुओ की तरह पछाड़ नया निजाम खड़ा कर म्हारे जैसै लोगो का सर्बकल्याण कर रहै है मगर सच बोल्यू तो भाया अब न तो हमारा मान सम्मान बचा है न ही वह महान स्वाभिमान ही शेष रहा है जिस पर संतोष कर हम जीवन निर्वहन करते थे और समृद्ध जीवन के स्वयं को असल वंशज कहते थे । 80 करोड़ के लगभग सस्ते राशन शुद्ध पेयजल को मोहताज म्हारा कुनवा बढ़ता ही जा रहा है और अब तो सहज जीवन जीना ही दुस्वार हो रहा है । बचपन बुड़ापा तो छोड़ो अब तो जबानी तक का बोझ बढ़ रहा है । ऐसा नही की हमारी कौम सामथ्र्य पुरूषार्थ विहीन हो और संपदा संसाधनो से बांझ हो मगर कै करे । अखाड़े जमाने चमकाने की चाहतो ने हमे मुफलिसी के दल दल मे धकेल रखा है । और थारे जैसा अधिकार सम्पन्न समाज भी कर्तव्यबोध के सबाल पर चुप बैठा है ।  

भैयै - लगता है चुनावी चकल्लसो के चलते तने भ्रमित हो रहा है कै थारे को 21बी सदी का चमचमाता म्हारे देश नही दिख रहा है । लगता है तने भी किसी न किसी अखाड़े से जाने अनजाने जुड़ चुका है इसलिये ही तने चमचमाते हमारे भबिष्य पर अर्र बर्र बक रिया शै । 

भैया - बस मने यही कहना चाहुॅ कि थारे कुनबे के जो लोग जिस अधिकार से कर रहै है वह न निष्ट है न ही कर्तव्य जो सर्बकल्याण की सबसे बड़ी बाधा है । गर थारे जैसै लोगो ने अधिकार के साथ कर्तव्य उन्मुख व्यवस्था खड़ी की होती तो आज म्हारे जैसै लोगो की ऐसी दुर्गति न हुई होती और बैचारे म्हारे भबिष्य को इस तरह अनाथो की तरह बर्तमान सबारने चुनावी संग्राम में ऐड़ी चोटी का जोर न लगाना पढ़ता । 

भैयै - लगता है तनै म्हारे निष्ठ होने पर सबाल खड़े कर रहा है थारे जैसै लोगो ने ही तो चुनावो मे कर्तव्य की बात न कर अधिकारो का बाजार चमका रखा है । और अब जब बजार चल पढ़ा है तब थारे को सेवा कल्याण सर्बकल्याण का जुमला सूझ रहा है जो अभी तो क्या कभी पूरा होने बाला नही जब तक कि कर्तव्यउन्मुख व्यवस्था का निर्माण नही हो जाता । 

भैया - मने समझ लिया थारा इसारा आगे से मने भी अब कर्तव्य उन्मुख व्यवस्था की ही बात करूगा और अपने बालो से भी अनुरोध कर यह कहुगा । कि फ्री का सस्ता छोड़ सिर्फ मेहनत कश ही दाता बन जाये जीवन में कुछ कर सके या न कम से कम अपने पूर्वजो की उस कड़ी तपस्या योगदान को तो न भुलाये जो उन्होने हमारे अपनो के बैहतर भबिष्य के लिये बैभाव किया है और हर हालत में अपना अपने बालो का मान सम्मान स्वाभिमान जिन्दा रखा है । जय स्वराज । 


 

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