दीपाली के दम और राजीव के रणकौशल से थर्राया शराब माफिया
मद्यसंयम के बीच मशक राजस्व की तैयारी
तीस फीसद उड़ान की तैयारी में आंकड़ा
वीरेन्द्र शर्मा
19 फरबरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. मे 1अप्रेल 2022 से 31 मार्च 2022 के लिये होने बाले शराब ठेको के शुरूआती रूझान बताते है कि अगर राजस्व की उड़ान इसी तरह कायम रही तो लगभग 30 फीसद का इजाफा होना राजस्व में तय है । म.प्र. कि नई शराब नीति से भले ही शराब माफिया हालिया तौर पर हथियार डालने पर बिबस नजर आता हो मगर लगता है मौजूद व्यवस्था में पैठ जमाये बैठा माफिया फिलहाॅल हथियार डालने तैयार नही । कारण म.प्र. मे पसरा अरबो रूपये का शराब कारोबार नई शराब नीति को लेकर भले ही भोपाल इन्दौर जैसै बढ़े राजस्व बाले शहरो मे एक दिन की दुकान बन्दी का कारण जो भी हो मगर इससे इतना तो स्पष्ट है कि कही न कही शराब माफिया अब सीधे तौर पर सरकार शासन से दो दो हाथ करने तैयार नजर आता है । अगर अपुष्ट जानकारो की माने तो जो लोग प्रशासनिक तौर पर दीपाली या राजीव की कार्यशैली से परिचित है । वह बखूबी जानते है कि माफिया का कोई भी मुगालता काम आने बाला नही । कारण व्यवस्था के प्रति उनकी निष्ठा और सार्थक सख्त निर्णयो के लिये उनकी पहचान । ऐसे में विभाग से लेकर , उत्पादक , वितरक हो या उपभोक्ता सभी के लिये नई नीति में वह सारी व्यवस्थाये साफ परिलक्षित है । मगर सबसे बढ़ा दर्द उस माफिया व्यवस्था का है जिसके चलते अबैध शराब का साम्राज्य म.प्र. मे बढ़ रहा था । ये अलग बात है कि सरकार पर जब तब दबाब शराब बन्दी का बना रहता है मगर राजस्व की बैबसी सरकार के हर उस कदम को रोक देती है जो शराब बन्दी की ओर जाता है । बहर हाॅल जो न्याय सिद्धान्त नई शराब नीति से परिलक्षित है उसमे उपभोक्ता से लेकर उत्पाक बिक्रेता सहित बढ़े राजस्व प्राप्ति की भरपूर संभावनाये है ऐसे मे देखना होगा कि 1 अप्रेल को क्या परिणाम प्रदेश और सरकार के सामने होगे क्योकि जो अन्तरद्वंद्व फिलहाॅल अधिकतम निधार्रित फुटकर मूल्य के रूप मे संकट बन रहा है और जिस तरह से खर्चो में इजाफा हुआ है उससे उपभोक्ता उत्पादको को तो राहत मिल सकती है मगर बिके्रताओ के आगे संकट बरकार है जिसमें अगर व्यवस्थागत माफिया घुटनो पर नजर आये तो इसमें किसी अतिसंयोक्ति नही होनी चाहिए ।
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