विश्वास तोड़ता , अनैतिक , निर्दयी , क्रूर व्यवहार
कोरोना योद्धाओ ने छेड़ा सड़क पर संग्राम
जनद्रोही मानसिकता और जन रक्षको में घमासान
उ.प्र. के शेष चुनावो में भस्मासुर साबित हो सकता है अहंकार
व्ही. एस. भुल्ले
28 फरबरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
जिस तरह से कोरोना योद्धाओ का दिल तोड़ म.प्र. की सत्ता ने जन रक्षको को सड़क पर संघर्ष के लिये लिये पहुॅचाया है उसे तो सिर्फ एक ही संदेश आम जन मानस के बीच जाता है कि कोई भी व्यवहार कितना निर्दयी , क्रूर , अनैतिक हो सकता है कि वह स्थापित नैतिक विश्वास को ध्वस्त कर इस तरह से विश्वास को चकना चूर कर दे कि जन रक्षा में जान लगाने बाली उस मानसिकता जनमानस का विश्वास इस हद तक टूट जाये कि संकट की घड़ी मे लोग मानवता या मानव धर्म ही भूल जाये शायद यही दर्द आज उन कोरोना योद्धाओ के दिल दिमाक में भी होगा जो आज सड़क पर बैठ सरकार के खिलाफ न्याय का नारा बुलंद करने पर बैबस मजबूर है । अगर बात रोध प्रतिरोध तक होती तो भी चल जाता मगर जिन कोरोना योद्धाओ ने अपनी जान हथेली पर रख म.प्र. मे टूटे कोरोना कहर से बिछती लाशो के बीच पराक्रम दिखा भयंकर बीमारी की बिभीषिका से म.प्र. को बाहर निकाला हजारो लाखो लोगो कि जान बगैर स्वयं जान की परबाह और स्वयं के परिवारो कि चिन्ता किये बगैर बचायी आज उन जन रक्षक कोरोना योद्धाओ जिन्है एक बाबू से कम पारिश्रमिक दिया गया उन्है एक झटके मे बाहर का रास्ता बड़े ही अपमानित तरीके से दिखा वह काम किया शायद ही इतिहास में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण हो कारण जब जन जीवन जिन्दगी मौत से जूझ रहा था सत्ता शासन के पास पर्याप्त साधन संसाधन तक नही थे और जिन्है सरकार शासन लाखो रूपये कि पगार दे रही थी लोग बाहर निकलना तो दूर सम्पर्क मे आने तक से परहेज कर रहै थे लोग मर रहै थे तब इन्ही कोरोना योद्धाओ ने उन मरते लोगो की सेवा कर उनकी जाने बचाई मगर सरकारे आजकल करोड़ो अरबो रूपया अपनी अपनी छबि चमकाने मे खर्च कर देती है और एक एक सभा मे करोड़ो फूक देती है आज उनके पास बाबू से कम पगार पर रखे उन कोरोना योद्धाओ को उनका पारिश्रमिक देने छदम तक नही जो उन्है 27 फरबरी से बाहर का रास्ता दिखा अपनी निर्दयी अनैतिक मानसिकता परिचय दिया । अगर सत्ताओ का आम समाज या मानव धर्म मे आस्था रखने बालो के बीच ऐसा ही संदेश रहा तो वह दिन दूर नही जब लोगो का विश्वास टूटने लगेगा और तब यही टूटा विश्वास भस्मासुर बन व्यवस्था को ही निगलने बैबस मजबूर होगा । मगर सबसे बड़ा यक्ष सबाल तो यह है कि जब पड़ौसी राज्य उ. प्र. मे सत्ता के लिये आर पार की जंग छिड़ी है और लगभग तीन चरण के चुनाव शेष है ऐसे मे म.प्र. की राजधानी की सड़क पर मय अखाड़े के साथ कोरोना योद्धा , जन रक्षको के खुले संग्राम को शह दे आग मे घी डालना कहां की अकलमंदी है । जब की उ.प्र. मे कांटे की जंग छिड़ी है । अगर म.प्र. की सड़को पर कोरोना योद्धा जन रक्षको की न्याय नैतिकता विश्वास को लेकर छिड़ी जंग की लपटो ने उ.प्र. को आगोस मे लिया और विपक्षी दल इसे ले उड़े तो उ.प्र. के शेष चुनाव मे सत्ताधारी दल का झुलसना तय है । क्योकि यह मामला राष्ट्र् जन की आस्था ही नही सीधे सीधे मानव धर्म जन धर्म से जुड़ा है जसके लिये सत्ताये अस्तित्व में होती है । अगर विश्वास तोड़ने बाली क्रूर मानसिकताओ पर प्रभावी रोक नही लगी तो निश्चित मानिये आने बाले समय में लोगो का विश्वास से ही विश्वास उठना तय होगा तब फिर न तो चमकाउ छबि काम आयेगी न ही वह अहंकार जो आज आम जन जीवन के लिये संकट पैदा कर अविश्वास का जहर समृद्ध समाज में घोलने का कार्य कर रहा है । जय स्वराज ।
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