सर्बकल्याण के सियासी संघर्ष में बिलखते संस्कार

 

हर एक का अपना अपना ऐजंडा अपने अपने सरोकार 

चुनावी समर में कूदे वीर बलशाली और पालनहार 

व्ही. एस. भुल्ले 


7 फरवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

देश के पाॅच राज्यो में छिड़े सियासी संघर्ष मे सर्बकल्याण के नाम पूर्व की भाॅती संस्कार कितने समृद्ध होेगे या विलखेगे यह तो फिलहाॅल भबिष्य के गर्भ में है । मगर अपने अपने ऐजेण्डो के साथ चुनावी मोर्चा जमा चुके वीर बलशालियो पालनहारो की पताखाये लहराने लगी है । जहाॅ हर राज्य मे समझ सैना बल के आधार पर अपने अपने सेनापतियो की घोषणा चुनावी समरयुद्ध मे दल कर चुके है । तो वही व्यानो के माध्यम से सियासी हमले भी जबरदस्त शुरू हो चुके है तो वही कमजोर मोर्चो पर स्वयं की ताकत बढ़ा अपनी अपनी जीत सुनिश्चत करने बंधन गठबंधन के माध्यम से दल एक दूसरे के खिलाफ पिल पढ़े है । मगर जिस जनता जनार्दन को लोकतंत्र मे जीत हार का फैसला करना है वह फिलहाॅल की सूरत में सायलेन्स मोड पर जा चुकी है । कोई वेवीनार के माध्यम से तो कोई घर घर जाकर सेवा कल्याण सर्बकल्याण के भाव प्रकट कर रहा है तो वही पंजाब से लेकर देश के सबसे बड़े सूबे उ.प्र. फिलहाॅल सुर्खियो मे छाये हुये है । हाॅल ही मे काॅग्रेस ने पंजाब मे उसके मुख्यमंत्री चेहरे के रूप मे सिद्धु को दरकिनार कर चन्नी पर ताकत झोेक दी है तो वही उ.प्र. मे भाजपा ने पुनः बाबा आदित्य योगी नाथ को मुख्यमंत्री चेहरे के रूप मे कमान सौप रखी है । तो वही कई दलो के गठबंधन के साथ मूल प्रतिद्वन्द्वी सपा ने अखिलेश के नेतृत्व मे आस्था व्यक्त की है तो वही ब.स.पा मायावती तो काॅग्रेस प्रियंका को भावी मुख्यमंत्री मान जानता के बीच अपनी अपनी बात रख रही है मगर इस बीच इस सियासी संषर्ष मे जहाॅ संस्कार जीवन सरोकार पानी भरते नजर आ रहै है तो सियासी दल अपने अपने माध्यम से अपने अपने ऐजेन्डे आगे बढ़ा रहै मगर कहते है सूचना क्रान्ति के दौर मे जनता भी कुछ कम समझदार नही जो चुप्पी साध इस सियासी घमासान मे किसी को भी अपनी मंशा का भान नही होने दे रही । मगर मुददा स्पष्ट है आम नागरिक की पहली पसंद सुरक्षा फिर जीवन यापन के सहज साधन संसाधन ही रहै है । मगर आम के बीच समृद्धि तभी संभव हो सकती है जब जनता ऐसे समृद्ध सर्बकल्याण मे निहित ऐजेन्डे पर मतदान करे जिससे स्व नही सर्बकल्याण का मार्ग प्रस्त हो सके । जय स्वराज ।  


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