करोड़ो के कबाड़े पर नई मरहम , साढ़े बारह करोड़ मिलेगे
शिवपुरी की संपदा लूट पर शासन की चुप्पी से उठे सबाल
करोड़ो का कबाड़ा , अब राज रियल को कमान
वीरेन्द्र भुल्ले
27 फरबरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
खनिज संपदा से समृद्ध म.प्र. के शिवपरी जिले मे ऐसा नही कि संपदा लूट की सुर्खिया कुछ नई हो बस हर मर्तवा सिर्फ नया किरदार बदल जाता है । यू तो आज से डेढ़ बर्ष पूर्व जिले मे रेत के माफिया राज पर लगाम लगाने जिले कि 15 रेत खदानो का ठेका म.प्र. खनिज निगम द्वारा वीनस ट्र्ेडर्स को अधिकतम बोली प्राप्त होने पर दिया था जिसकी कुल कीमत लगभग 3 बर्ष के लिये 22 करोड़ थी । मगर वीनस ट्र्ेडर्स द्वारा मात्र 15 माह बाद ही कार्य छोड़ दिया । जिसके चलते 12 फरवरी 2022 को आमंत्रित निविदा मे यह ठेका राज रियल को साढ़े बारह करोड़ की कीमत पर मिल गया । ज्ञात हो कि इस निविदा मे 3 फर्मो ने भाग लिया जिसमें के.पी. सिंह , सुनील सिंह और राज रियल ने अपनी अपनी दरे क्रमशः 5.51 , 5.06 , 12.51 करोड़ दी जिसमे सर्बाधिक दर राज रियल की होने के कारण इस मर्तवा कुल 15 रेत खदानो मे से 5 डूबत क्षैत्र की छोड़ने के बाद कुल 10 रेत खदानो का ठेका साढ़े बारह करोड़ मे गया । जिसे 15 दिन के अन्दर 50 फीसद नगद राशि जमा करानी होगी । मगर यहां सबसे बड़ा यक्ष सबाल यह है कि रेत खदाने विगत कुछ माहो से बन्द है । तो फिर समुचे क्षैत्र में रोजाना सेकड़ो बाहनो से रेत किस खदान से आ रही है और जिस वीनस टे्र्डर्स ने बीच मे ही कार्य छोड़ दिया उससे क्या बसूली की कार्यवाही हुई । ऐसे कई अनगिनत सबाल है जो शासन से भी होना चाहिए और सरकार तथा जनप्रतिनिधियो से भी होना चाहिए । वरना संपदा लूट मे जुटे माफियाओ का सम्राज्य यू ही फलता फूलता रहैगा । हालाकि की जिले कि संपदा लूट और प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित रखने के पक्षधरो का मानना है कि इस जिले मे खनिज , संपदा लूट सियासत का अब आर्थिक संबल बन चुका है और जो लोग भी सत्ता में संरक्षण पाते है वही गाहै बगाहै इस जिले कि प्राकृतिक संपदा को नुक्सान पहुॅचा अपना अपना घर भरते रहै है । अगर करोड़ो के ठेके लेकर शासन को आर्थिक छति पहुॅचाने बाले और उनके भागीदारो के नाम उजागर हो तो सारा मामला स्वतः ही सिद्ध होते देर न होगी । मगर लगता नही 30 बर्ष का यह कारबा इतनी आसानी से थमने बाला नही । शिवपुरी मे सिर्फ रेत ही नही फर्सी पत्थर , क्रेशर सभी दूर सियासी लोगो का सम्राज्य पसरा पढ़ा है ।
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