कमाई को लेकर शासन , शराब माफिया आमने सामने
शासन का अरबो रूपये का राजस्व दांव पर
4 दिन का समय शेष , आधे अधिक दुकानो को उठने का इन्तजार
नई शराब नीति और शराब ठेकेदारो को उठे सबाल
वीरेन्द्र भुल्ले
28 मार्च 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
राजस्व को लेकर शराब बन्दी पर आनाकानी करने बाली सरकार का संकट अब दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है नये बर्ष के शराब ठेको को अब 4 दिन शेष बचे है जबकि आधे से अधिक शराब दुकाने उठने के इन्तजार मे है । ऐसे अब लगता है कमाई को लेकर शराब माफिया और शासन आमने सामने नजर आते है । कारण शासन पर गलत शराब नीति का आरोप तो वही शराब ठेकेदारो को अपनी डूबती लागत खतरा अगर जानकारो की माने तो शराब ठेकेदार के सामने सबसे बढ़ा सबाल तो शराब बैचने की कीमत को लेकर है जिसमे शासन द्वारा दर र्निधारित कर रखी है । तो वही जो निर्णय देशी अंगे्रजी को एक ही दुकान से बैचने को लेकर है तो वही तीसरा प्रमुख कारण दुकानो के ग्रुप बनाते समय असाबधानी रही तो एकल प्रथा खत्म कर विभिन्न ग्रुपो मे बाट देना रहा जिससे ठेकेदारो का मानना है कि जब सस्ती या छोटी देशी शराब दुकानो से अगे्रजी शराब बिचेगी तो जो दुकाने अंग्रेजी की 10 या 20 करोड़ लागत है ऐसी दुकानो की बिक्री बिगड़ना स्वभाबिक है जो घाटे का सोदा सिद्ध हो सकता है । तो वही दूसरी ओर जो मुनाफा ठेकेदारो द्वारा स्वयं बिक्री दर समस्त खर्चो को शामिल कर उपयोग लाई जाती थी उससे ठेकेदार अपने घाटे को पूर्ण करने मे कामयाब हो जाते थे मगर मौजूद नीति मे ऐसा कुछ नही जिससे शराब ठेकेदार जोखिम उठा पाते । ओर सबसे अहम कारण यह भी है कि जो बड़े बड़े ठेकेदार अभी इस व्यवसाय मे लगे है वह बखूबी जानते है कि जिस तरह से ग्रुप निर्धारण दुकानो के लेकर हुआ है और जिस पैटर्न पर आयदिन टेन्डर बुलाये जा रहे है उससे नया कोई ठेकेदार जोखिम उठायेगा यह संभव नही ।
मजबूर होकर या तो शासन को स्वयं दुकाने चलानी होगी या कुछ दुकानो की तालाबन्दी करनी होगी । जिसका पूरा लाभ शराब माफिया को मिल सकता है । या मजबूर सरकार अपनी निर्धारित बोली दर कम कर शेष दुकानो को देने पर बैबस होगी । मगर जिस तरह के अब हालात बन चुके है इससे शासन को लाभ होगा या शराब माफिया को यह तो आने बाला समय तय करेगा मगर इतना तो तय है कि फिलहाॅल शासन का अरबो का राजस्व संकट मे फसा है ।

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