न मुददे न मैजिक तो फिर क्या ?
अब सियासी आकलन जो भी हो फिलहाॅल तो सूपड़ा साफ
सियासी समझ, संसाधन , स्वाभिमान और सूचना बनी तारनहार
केनवास के अभाव में आकृति तलासता कल्याण
व्ही. एस. भुल्ले
11 मार्च 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
केनवास के अभाव में आकृति तलासता सेवा , कल्याण स्वयं सिद्धता का नाम जो भी दे या उसे जो भी नाम मिले मगर सत्य यह है कि हालिया हुये 5 राज्यो के चुनावो में न तो कोई मैजिक चला न ही मुददे परबान चढ़े सिर्फ और सिर्फ सियासी समझ , संसाधन , स्वाभिमान और सूचना का पुख्ता काम रहा और शेष का सूपड़ा साफ हो लिया । अब इस हार जीत का आकलन होगा तथ्य तलासे जायेगा मगर कारण क्या रहै यह तो सिर्फ समय ही बता पायेगा । क्योकि कहावत है कि विधि के विधान को कोई नही पलट सकता । जैसा कि हमारे महान पवित्र ग्रन्थो से भी सिद्ध है । कहा गया है कि में चाहता किसी ओर को था , मुझे चाहता कोई ओर था , और हो मे किसी और का लिया। अर्थात मानव जीवन का यह वह कटु सत्य है जिसे स्वयं विद्याता भी नही बदल सके । हालाकि प्रमाणिक तथ्य यह है कि 4 राज्यो मे सत्ता की पुनः बापसी हुई है तो 1 राज्य पंजाब में ऐसा क्लीन स्वीप हुआ कि बड़े बड़े आधार धरासायी हो लिये । और भारत की सियासत में एक ऐसी सियासत का सूत्रपात हो गया जो कहां जा जाकर रूकेगी कहना जल्दबाजी होगी । मगर यह नया सूत्र पात उन सियासी दलो और आमजन के लिये स्पष्ट संदेश है कि सियासत मे कब क्या हो जाये कोई भी यकीनी तौर पर नही कह सकता । हां जिनकी अध्यात्म में गहरी आस्था और मौजूद यथार्त विज्ञान मे गहरा विश्वास है । जो अनादिकाल से सर्बकल्याण कारी और कल्याण का हामी रहा है । वह अवश्य कुछ आकलन करने मे सक्षम हो सकते है । मगर जो कांरबा अक्स के आभाव मे कल्याण का सक्षम सफल खाका खीचने मे लगे है और बार बार मानव जीवन को समृद्ध खुशहाल बनाने मे अक्षम असफल सिद्ध हो रहै है यह उन्है समझने बाली बात है कि बगैर कल्पना अर्थात अध्यात्म अक्स के सुन्दर केनवास नही बन सकता और यह तभी सम्भव है जब प्रयास सार्थक सफल और संसाधनो का प्रयोग सर्बकल्याण मे हो न की हार जीत के खेल मे क्योकि सृष्टि मे हर जीवन का सार्थक संबर्धन संरक्षण ही हर जीवन का मूल धर्म कर्म होता है फिर उसकी पहचान जो भी हो जिसमे आज भी हम असफल अक्षम सिद्ध हो रहै है और जो भी इस यथार्त तथ्य को लेकर चलेगा वह आने बाले समय मे सराहा जायेगा और सम्मान के साथ जाना जायेगा । क्योकि आसमानी सुल्तानी हवाओ से स्वरूप तो बदला जा सकता है मगर जीवन उपयोगी शीत लहर का आनन्द प्राप्त नही किया जा सकता इस लिये मुददे मैजिक की बाते तो सिर्फ बैमानी ही कही जायेगी क्योकि आज की सियासत मे सूचना संसाधन समझ स्वाभिमान का उतना ही स्थान है जितना इससे पूर्व भी सत्ता संघर्षो के लिये होता रहा है । जय स्वराज ।
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