बैबस जीवन , बिलखती मानवता समृद्ध , श्रेष्ठ जीवन को कलंकित करता , सामथ्र्य पुरूषार्थ
सत्ता , सतत सत्ता , स्वार्थवत सियासत में स्वाहः होते संस्कार
समृद्ध समाज , संस्कृति हुई कंगाल
व्ही.एस. भुल्ले
29 मार्च 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
खाद्य सुरक्षा स्कीम आजाद भारत मे आम गरीबी का वह पुख्ता प्रमाण है । जो एक समृद्ध समाज , संस्कृति , भूभाग और आजादी से पूर्व डाॅलर के मुकाबले रूपये का मूल्य रखने बाली अर्थव्यवस्था को कलंकित करता है । ऐसे मे बिलखती मानवता बैबस जीवन भले ही बैलगाम हो मगर सत्ता , सतत सत्ता , और स्वार्थवत सियासत का नंगा नाच कंगाल होती समृद्ध संस्कृति समाज को समझने काॅफी है । श्रेष्ठ संस्कृति संस्कार को कलंकित करता सामथ्र्य पुरूषार्थ आखिर कौनसा इतिहास रचना चाहता है यह चर्चा का विषय हो सकता है मगर यकीनन वह समाधान नही हो सकता ऐसे आवश्यक है कि मानव जीवन के रूप मे प्राप्त जीवन की श्रेष्ठतम कृति कुछ करे और जीवन की सिद्धता सिद्ध करे । जो हमारे पूर्वज हजारो बर्षो कि जीवन यात्रा मे सिद्ध करते रहै है । कहते है कि सत्ता और सतत सत्ता अच्छे अच्छे को पागल करती रही है जिन्है सत्ता मद में मानव जीवन के रूप मे यह भान ही शेष नही रह जाता कि उसका अस्तित्व मानव जीवन के रूप मे क्यो श्रेष्ठ कहा गया है । कैसै वह कल्याण के मार्ग को छोड़ जीवन द्रोह के रास्ते पर चल निकल पढ़ा है । और जीवनो को भी द्रोही सिद्ध करने में लग जाता है सत्ता मद में बने रहने की उसकी प्रबल चेष्टा उसे किस हद तक अन्धा कर देती है कि वह अपनी समृद्ध संस्कुति संस्कारो के विनाश पर भी संकोच नही करता । ये अलग बात है कि जीवन का जीवन से द्रोह कोई नई बात नही मगर जब मानव जीवन की श्रेष्ठतम कृति के रूप मे जीवन से द्रोह का मार्ग प्रस्त करता है तो स्वतः ही उसके अस्तित्व का खात्मा सुनिश्चित हो जाता है । अगर हम अध्यात्म से जुड़ी चर्चाओ कि माने तो देवी देवताओ मे भी मानव जीवन की लालसा रहती है मगर जिन्है यह जीवन प्राप्त है वह आज उसके मूल से अनभिज्ञ है । और कल्याण के मार्ग को छोड़ विनाश के मार्ग पर बढ़ रहै है । जो सभी के लिये चिन्ता का विषय होना चाहिए । क्योकि यह अभाव ग्रस्त , बिलबिलाता ,बिलखता जीवन न तो इतिहास की धरोहर है न ही इसे हमारा बर्तमान होना चाहिए न तो आने बाली पीढ़ियां फिर किसी की भी हो वह भी जीवन के इस जघन्य द्रोह से स्वयं को बचाने मे असफल अक्षम सिद्ध होगी तब हमे किस कृति कृतार्थ जीवन के रूप मे जाना जायेगा यह हम बैहतर ढंग से समझ सकते है । जय स्वराज ।

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