सुरसा बनती वोट लालसा


भ्रष्टाचार और कर्तव्य विमुखता से बिलखा इन्सान 

बिगड़ी व्यवस्था पर ताल ठोकते अधिकार 

बांझ संरक्षण सुरक्षा पर बिलाप करते समृद्ध जीवन सरोकार 

व्ही. एस. भुल्ले 


14 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

सुरसा बनती वोट लालसा बिलाप करते समृद्ध जीवन सरोकारो को संरक्षण सुरक्षा के अभाव में कहा ले जाकर कहा छोड़गी यह कहना तो जल्दबाजी होगी मगर भ्रष्टाचार और कर्तव्य विमुखता जिस तरह से इन्सान बिलबिला उठा है आज वह किसी से छिपा नही । बिगड़ी व्यवस्था पर ताल ठोकते अधिकार को भले ही आज स्व स्वार्थो के चलते मानव जीवन के मूल कर्तव्यो का भान न हो मगर जीवन की समृद्धि तब तक जीवन को नसीब नही हो सकती जब तक की जीवन और समृद्ध जीवन से जुड़ी व्यवस्था जबाबदेह कर्तव्यउन्मुख नही हो जाती और भ्रष्टाचार पर लगाम नही लग जाती । मगर आज यह बड़ा ही कठिन सबाल हो सकता है । मगर हल तो खोजना ही होगा । विधि संरक्षण मे स्वयं के अधिकारो को कर्तव्य समझ पुरूषार्थ करने बाले मानव जीवन की सबसे बड़ी दुबिधा यह है कि सही मायने मे न तो वह विधान का ही अनुसरण कर पा रहा न ही वह विधि संबत व्यवस्था को अंगीकार कर पा रहा है । कारण वोट लालसा मे अंधी जमात को जहा सिर्फ और सिर्फ वोट से बास्ता रह गया है जिससे वह सत्ता के सहभागी बन सके । तो मातहत स्वयं के जीवन को समृद्ध करने भ्रष्टाचार के दल दल मे कूद कर्तव्यो कि इतिश्री मे जुट जाते है । फिर चाहै वह सुरक्षा संरक्षण की बात हो या फिर सेवा कल्याण की जिसमे पानी बिजली स्वास्थ सड़क राशन घर मकान शासकीय भूमि की हो । मगर सब कुछ चल रहा है । जिसे सुधारने रोकने की न तो किसी को दिल चस्वी है न ही मानवीय मूल्यो जीवन मूल्यो से कोई बास्ता आज जितनी भी समस्याये सर उठा आम जीवन को लहुलुहान किये है उसके पीछे बिशुद्ध रूप से कार्य का निष्ठापूर्ण मूल्यांकन का अभाव कर्तव्य जबाबदेही से बिमुखता ही है । अगर हम गली मोहल्लो से लेकर मूल सड़क शासकीय भूमि , परिसंपत्तियो पर अबैध अतिक्रमण के मामले हो या फिर सेवा सुबिधाओ की दुदर्शा सभी दूर अराजकता पसरी पढ़ी है रहा सबाल भ्रष्टाचार का तो आय दिन रिश्वत लेते रगो हाथो पकड़े जा रहे शासकीय सेवक अधिकारी इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार किस हद तक व्यवस्था के बीच अपनी गहरी जड़े जमा चुका है । अब विचान उन श्रेष्ठजन सज्जन पुरूषो उस मानव समाज को करना चाहिए । जिनका जीवन मे अस्तित्व ही मानवता इन्सानियत की रक्षा के लिये है । ऐसे समृद्ध जीवनो की सुरक्षा संरक्षण की जबाबदेही भी कर्तव्य मे शामिल होनी चाहिए जिनके संरक्षण सुरक्षा के अभाव मे मानवता व समाज के दुश्मन सर उठा उन्ही के नाम अधिकारो की फसल काट स्वयं को सक्षम सफल सिद्ध कर शेष मानव या जीवनो का समृद्ध जीवन संकट मे डाल उन्है खून के आंसू रोने पर विबस कर स्वयं को समृद्ध बनाते है । अगर इन अहम सबालो पर हम आज भी चुप रहै तो आने बाला समय और अधिक संकट कंटको से भरा हो तो इसमे किसी अतिसंयोक्ति नही होनी चाहिए । जय स्वराज । 



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