हनक की हा हाकार से मचा कोहराम ..........? तीरंदाज


विधि विद्यान पर उठे सबाल 


व्ही. एस. भुल्ले 

16 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

भैया - कहते है हनक किसी कि भी हो जब कानून का हेन्टर चलता है तो अच्छे अच्छे डकरा जाते है । फिर वह विधि का माखौल उड़ाने बाले हो या विद्यान को दरकिनार कर अपना हित साधने बालो हो मगर जब से बिल्डोजर काॅल क्या शुरू हुआ है उसने अच्छे अच्छो की नीद उड़ा रखी है । फिलहाॅल तो अन्दर खाने कि खबर यह है कि हनक बालो के बीच अच्छा खासा हा हाकार मचा है । इस बीच फूल से कोमल और बज्र से कठोर होने का जुमला भी बदस्तूर जारी है अब भाया ऐसे मे सच क्या म्हारे तो कुछ समझ नही आ रहा है क्या तालाब नदी नाले नीब खोदने की जगह इसी तरह बैखौफ बिल्डोजर दौड़ेगे और एक से एक आलीशान महलो को इसी तरह कुचलेगे । 

भैयै - डोजर बिल्डोजर की बात तने म्हारे से न कर कै थारे घट की फूटी है जो थारे को सीधी हबाहात की फोटो नही दिखती है । सुना है कभी अपनी एक चिहांड़ से खबर जगत को हिला देने बाला खबर का हाथी बिना दाने पानी के कई महिनो से भूपाल की सड़को पर हफा रहा है । कभी भूपाल मे राज करने बाला खबरो का राजा बुल्डोजर से मिले घावो को आज तक सैला रहा है जिसमे मालबा सफारी के शेर का तो इतना बुरा हाॅल हुआ कि वह तो आज तक पैर नही जमा पा रहा है । सो तने म्हारी सलाह माने तो चुप ही कर और हो सके तो खेतो मे खड़ी फसलो को मण्डी तक पहुॅचाने की व्यस्था चिन्ता कर वरना खड़ी फसलो की झुलसने की खबरे भी खूब चल रही है । और सरपट दौड़ती कारे भी इस भीषण गर्मी मे सरेयाम पलट रही है । थोड़ा कहा बहुत समझना और भूल के भी बुल्डोजर विधि विधान बालो के चक्कर में मत पढ़ना । 

भैया - तो क्या मने चुप कर जाउॅ और सारा कुछ विपक्षियो की तरह छोड़ थारी तरह अपने झौपड़े में बैठ जाउॅ ? 

भैयै - तने तो बाबला शै कै थारे को मालूम कोणी अब तो घर घर बिजली , नैट , मोबाइल है । मोबाइल मे इस्टाग्राम , बाटसब , फैसबुक , गूगल बहुत सारा सामान है कै थारे को मालूम कोणी अब तो जन्म के साथ ही म्हारी पीढ़ी मोबाइल की छत्रछाया मे पल बढ़ रही है घरो मे गाड़ी भरे होने के बाद भी एक दूसरे से नही बोल रही है । और थारे को बैबजह ही मशखरी सूझ रही है । 

भैया - मने जाड़ू थारे जैसे चिन्दी पन्ने बाले से और उम्मीद भी क्या कि जा सकती है । सामाजिक , राजनैतिक , सत्तागत राजधर्म जीवन सरोकारो पर तो बात की ही जा सकती और कर्तव्य विमुखता कि मजम्मत कर जीवन की कृतज्ञता पर तो टिप्पणी की जा सकती है । 

भैयै - मने तो लागे कि तने तो तने , तने म्हारा भी बैड़ागरग कराके के मानेगा थारे तन पर तो बैसै ही लगोटी शेष बची है लगता कुछ दिन और थारे प्रवचन ऐसे ही सुनता रहा तो नजर पढ़ते ही म्हारी भी पतलून उतरने बाली है । कै थारे को मालूम कोणी खण्ड खण्ड आस्थाओ के बीच अखण्डता का अभियान चल रहा है । और संस्कारिक आधार पर एक नई कौम संस्कृति का निर्माण दिन रात चल रहा है । राज काज राजधर्म की बातो के बतासो से पैट नही भरते जिन्दा रहने सिर्फ वही हुनर काम करते है जो चुप की दीक्षा ले राजभक्ति मे जुट जाते है । और आने बाले चडौ़त्रे से मौज मस्ती से जीवन चला स्वयं को बड़ा सेवक दाता सिद्ध कर जाते है । 

भैया - मने समझ लिया थारा इसारा अब तो मने भी चुप रहुगा और दिन रात चासनी मे डूब मीठा मीठा गप और कड़बा कड़बा थू के सिद्धान्त पर चलूगा । जब गाड़ी भरे करोड़ो लाखो फूक इसी अभियान मे जुटै है तो फिर म्हारे को क्या ? अब देखना मने भी कैसै हाथो हाथ खेल जमाउगा और मौका मिलते ही सेवा कल्याण की मुख्यधारा से जुड़ जाउगा तब तो म्हारी चल जायेगी और इस दीनहीन कंगाली से म्हारे को भी मुक्ति मिल जायेगी । और देखते ही देखते म्हारी मुफलिसी के साथ थारी मुफलिसी भी दूर हो थारी चिन्दी भी मल्टीकलर मे नजर जायेगी । जय स्वराज । 


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