अंगीकार विधि विधान में लोकतंत्र
लोक का कर्तव्य उन्मुख तो तंत्र का जबाबदेह होना जरूरी
बैधानिक अधिकार प्राप्त व्यवस्था की विडंबना
व्ही. एस. भुल्ले
18 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
समृद्ध , खुशहाॅल , सुंरक्षित जीवन को लेकर अंगीकार विधि विधान में सब कुछ स्पष्ट है मगर व्यख्या में डूबी व्यवस्था का दुर्भाग्य यह है कि वह अंगीकार के दिन से आज तक यह सुनिश्चित करने में क्यों अक्षम , असफल सिद्ध होती रही जिसके लिये लोकतंत्र में उसका वैधानिक अस्तित्व है । अखिर वह क्यो उस मुकाम को हासिल नही कर सकी जिसकी कि आम आशा आकांक्षाओ को आज भी उम्मीद है । करोड़ो करोड़ लोगो के विश्वास पर खड़ा लोकतंत्र क्यो जरा जरा सी बातो पर लड़खड़ाने लगता है आखिर क्यो लोगो का विश्वास टूटने लगता है उनके ही द्वारा अंगीकार व्यवस्था से ? कारण साफ है कि जब तक कर्तव्य उन्मुख लोकाचार और विधि संबत जबाबदेह व्यवस्था अपना अस्तित्व स्थापित नही कर लेती तब तक हमें ऐसे अनेको अनेक अनबुझे सबाल से जूझना पड़ेगा जिनका समृद्ध खुशहाॅल सुरक्षित जीवन से दूर दूर तक कोई बास्ता नही । मगर यह कटु सत्य है कि आजकल ऐसे अनेको अनेक सबालो की आम जीवन ही नही व्यवस्था में भी खासा बोलबाला है । जिनका समाधान आज नही तो कल ढूढ़ना ही पढ़ेगा तभी हम एक समृद्ध मजबूत लोकतंत्र बन पायेगे जो कभी हमारे समृद्ध खुशहाॅल सुरक्षित जीवन का आधार और हमारी पहचान रही है । ये सही है कि अधिकारो के जुनून में डूबी आशा आकांक्षाये कर्तव्यबोद्य से कोसो दूर होती जा रही हो और वैधानिक जबाबदेहो की जमात महात्वकांक्षाओ में डूब मंत्र मुग्ध हो अपना आचरण व्यवहार विधि विधान संबत ठहरा रही हो मगर परिणाम उतने सार्थक सर्बस्पर्शी नही दिख रहै जो आज समाधान के बजाये संकट का सबस बन रहै है । सलाह मशविरे उन से मांगे जा रहै है जिनको अकल डाढ़ आने मे 25 से 30 बर्ष मानव के नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप लगते है । बर्तमान की बिना पर इतिहास और भबिष्य गड़ने के कार्य आज तकनीको से कराये जा रहै है । अगर यह हमारे सार्थक निरर्थक जीवन का सत्य सिद्ध होने बाला है तो फिर कोई बड़ी उम्मीद हमें मानव जीवन से नही की जानी चाहिए । कहते जिस जीवन का न तो अंक न ही रेखा गणित उत्तम हो वह कैसै कोई भी ऐसी फ्रेम तैयार कर सकता है जो लोक कल्याण के साथ जीव जगत कल्याण में सक्षम हो उसे एक सटीक दिशा दे उस जीवन मार्ग को तैयार कर पाये जो समृद्धी खुशहाॅली की ओर जाता है । अब विचार उन लोगो को करना है जो दक्ष सक्षम सज्जन और सर्बकल्याण मे गहरी आस्था रखते हो । जय स्वराज ।

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