लोकतांत्रिक सदी के , ऐतिहासिक सुशासित , साॅशल चित्र पर कटे बबाल , पर मानव जगत का संज्ञान .........? तीरंदाज


व्ही. एस. भुल्ले 

9 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


भैया - निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन पश्चात लोकतांत्रिक सदी का ऐतिहासिक चित्र वायरल करने बालो के बाद अब तो थारी भी हलक में अटकी होगी क्योकि देश भक्ति जनसेवा क्या क्या कर सकती है । हालाकि म्हारे मुखिया इस बात को लेकर मातहतो के आचरण से खासे सख्त नाराज है कि वायरल चित्र से म.प्र. की बैसकीमती फिजा जिसे बनाने मे न जाने कितने करोड़ फूक दिये वह खराब हो रही है और देश मे संदेश अच्छा नही जा रहा है । ये अलग बात है कि निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन करने बाले मातहत दण्ड स्वरूप लाइन अटैच के साथ देशभक्ति जनसेवा के दायित्व से निलंबित किये जा चुके है । अन्दर खाने की खबर अगर सही है तो कप्तान साहब की निष्ठा से भी मुखिया बहुत कुछ संतुष्ट नही है । हालाकि देशभक्ति जनसेवा के कार्य में जुटे सेवको की दलील थी कि अर्धनग्न अवस्था मे हवालात मे बैठै और प्रभारी के चैम्बर मे नेकर मे खड़े होने के पीछे उनकी बहुमूल्य जान की रक्षा ख्याल रखा गया ये अलग बात है कि उन नागरिको की जान तो बच गयी मगर उनकी इज्जत का जनाजा निकलने से नही बच सका । जिस को लेकर मौजूद मानव समाज मे बबाल कटा पढ़ा है जितने लोग उतनी राय , मानव अधिकार से लेकर शाॅसल मीडिया पर भले ही निष्ठा का सबाल उठ रहा हो मगर म्हारी महान मीडिया अभी भी मालिको तो ऐन्कर प्रोडूसर के इन्तजार में हो , मगर इतिहास तो बन ही गया । मने न लागे थारी भी कोई टिप्पणी इस यक्ष सबाल पर आने बाली है थारे धीमी गति के ब्लैक इन व्हाइट चिन्दी पन्ने मे भी इसे जगह मिलने बाली है । 

भैयै - मुये चुप कर कै थारे को मालूम कोणी हबालात मे नेकर मे खड़े लोगो मे दो हमारे बाले भी है । और म्हारे सुशासन को चार चाॅद लगा देशभक्ति जनसेवा मे की गई कार्यवाही को सही ठहराने बाले चोटी के अधिकारी है जिन्होने थारे जैसै शंका कुशंका बालो के मुगालते दूर करते हुये बताया कि कार्यवाही सही है । इसलिये अब तो म्हारा कलैजा भी मुॅह को आता है । मगर एक संतोष भी है कि लोकतंत्र मे देशभक्ति जनसेवा को एक सही दिशा तो मिली । 

भैया - तो क्या अब यह मान लिया जाये कि अब जो भी देशभक्ति जनसेवा के हाथ आयेगा उसका हबालात से पूर्व जान रक्षा का कार्य ऐसे ही किया जायेगा । फिर म्हारे उन नेता नेत्रियो का होगा जो अपनी राजनीति चमकाने आये दिन आन्दोलन करते कभी उन्होने भी अस्थाई हबालात या जैल मे कुछ घन्टो के लिये खुली जैल मे रखा जाता था । तो क्या मने यह मान लू अब आगे से सभी हबालातियो का यही हाॅल किया जायेगा । बैसै भाया मने तो सुना है मानवो के अधिकार के लिये आयोग है जो जैल के अन्दर मानवो के अधिकारो का हनन तो नही हो रहा देखता है । तो क्या हबालात मे भी देख सकता है । 

भैयै - सुशासन के इस दौर में तने चुप करा जा बरना थारा तो थारा म्हारा भी ऐतिहासिक चित्र वायरल हो जायेगा सबसे पहले सुशासन का नही अपने बालो का व्यान साॅसल पर वायरल हो जायेगा कि असली नकली कौन । फिर सुशासन बतायेगा कि विधिसम्बत क्या है ? बैसै भी जब से म्हारा अवतरण इस लोकतांत्रिक व्यवस्था मे म्हारे को मेहसूस हुआ है तभी से म्हारी तो हलक में अटकी है । और म्हारी दिशा दशा दोनो भटकी है । क्योकि बैसै भी हमारी सामाजिक और विधिसम्बत व्यवस्था कर्तव्य कम अधिकारो मे सिमटी है । सो जिसको जो अधिकार है विधिसम्बत वो उनका निष्ठापूर्ण निर्वहन कर रहै है । अब ऐसे मे तर्क कुतर्क या किसी की इज्जत के जनाजे निकल रहै है । तो इसमे नया क्या ?

भैया - मने समझ लिया घोर राष्ट्र् और भक्ति भाव का दौर चल रहा है । इस बार कुछ ज्यादा ही सेवा हो ली इस लिये मानव को लेकर बबाल कट रहा है । मगर ऐसे सबाल और बबाल क्या कर लेगे जब मानव ही मानव की इज्जत का जनाजा उठा उसे गर्व गौरव से कंधे दे रहा है । स्वामी भक्ति से पटा मानव समाज इससे अधिक और क्या मानव सेवा कर सकता है । फिर भक्त तो भक्त है उसके समर्पण पर निष्ठा कदाचित उचित नही फिर क्षैत्र जो भी हो । म्हारे को तो लागे कि कलयुग पूर्व भक्ति काल शुरू चुका है । जिसमे किसी पर भी सबाल उठाना किसी खतरे से खाली नही खासकर तब की स्थति में जब सारा मानव समाज नैट का गुलाम तो साॅसल मीडिया का शौकिन हो चुका हो जहां बिना लगाम के ही भावनाओ के घोड़े दौड़ रहै है किसी को टापो तले तो किसी को काठी से ही रौद रहै है । सो भाया थोड़ा कहा बहुॅत समझना और भक्तो से बचके ही रहना इतने पर तो चल जायेगी वरना मने न लागे की थारी और म्हारी आस्था अब ज्यादा दिन सुरक्षित रह पायेगी । जय स्वराज । 


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