स्थानीय सरकारो का कुंभ शुरू


जरूआ , खोसोओ की बाढ़ से मचा मैदाने जंग में हड़कंप ....? तीरंदाज 

व्ही. एस. भुल्ले 


भैया - सियासत के मण्डलेश्वर महामण्डेश्वरो के सियासी संघर्ष के बाद शुरू हुये स्थानीय सरकारो के कंुभ मे किसको कितना पुण्य प्राप्त होगा यह तो परिणाम तय करेगे मगर जरूआ खोसोओ की तैयारियो को देख म्हारा तो कलैजा मुॅह को आबै आखिर मने कै करू बैसै भी म्हारे जैसै मूढ़धन्यो को इस दिन के लिये कितना संघर्ष झेलना पढ़ा है यह तो म्हारे से बैहतर कौन जान सके है मगर जरूआ खोसोओ की बाढ़ देख म्हारा तो दिल ही बैठा जा रहा है । एक जरूआ पूॅछ रहा था और खोसो खड़ा कान लगाया सुन रहा था के इस मर्तवा सियासी मैदान में वाक्य में जंग छिड़ेगी । या फिर न्याय के नाम शान्ति की खातिर फिर से तारीख बढ़ेगी । 

भैयै - जब भीषण गर्मी और बारिस पूर्व घोर घोषड़ा हो चुकी है । और लोकतंत्र के रक्षको की प्रेस कान्फ्रेन्स हो चुकी है तो अब गाॅंब गली की सरकारो के लिये भीषण संग्राम छिड़ना तो तय है । रही बात जरूआ खोसोओ की तो थारे जैसै लोगो को गर्व होना चाहिए कि पहचान मिट जाने के बाबजूद भी उनका बजूद , आधार , अस्तित्व हमारे बीच भरा पढ़ा है । पहले तो उनका स्थान मैदाने जंग के आसपास होता था अब तो भाया गांब गलियो तक पसरे पढ़े है । मगर थारे को क्या यह तो सत्ता सियासत की नियती होती है जहां भी सत्ता के लिये संग्राम छिड़ता है वह तो स्वतः ही प्रगट हो जाते है फिर वह चाहै सियासी संग्राम का मैदान हो या फिर सेवा कल्याण का संग्राम सभी दूर उनकी पताखा बुलंद है । फिर थारे को क्या ? तने तो तैयारी कर , जरूरी हो तो किला फतह करने सियासी अस्त्र शस्त्रो के साथ अखाड़े बाजो की संगत कर कैसै भी हो इस उखाड़ पछाड़ के खेल में फतह हासिल कर अपना नाम रोशन कर । 

भैया - ऐसी फतह मने न चाहुॅ कि हारू तो में लुटु और जीतू तो म्हारी प्रजा लुटे सेवा कल्याण के नाम ऐसा खेल थारे को मुबारक मने न खेलना चाहुॅ मने क्वीट करना चाहुॅ । 

भैयै - अरे बाबले चल गया तो जादू और चूक गये तो सियासी मौत सो भलाई इसी में है कि इस कुॅभ मे तने भी डुबकी लगा डाल और हण्डे कुण्डे बचे न बचे कम से कम कलमुहै भाग्य तो आजमा डाल सुना है थारा समय अच्छा चल रहा है और जीत का सहरा थारे ही माथे बंॅध रहा है सो चूक तनिक सी भी नही करना और प्रहार ऐसा करना की कोई भी अड़दंग न आने पाये और एक ही बार मे जीत थारी झोली में नजर आये । तब तो एक ही झटके मे तने भी परमेश्वर बन जायेगा और हाथो हाथ चैपाल लगा सेवा कल्याण के ऐतिहासिक फैसले ले पायेगा । 

भैया - मगर काड़ू तो बोल्या कि रे मत पढ़ना तने पंच परमेश्वर के पचड़े मे कर्जे से बची रही सही बीघा दो बीघा भी कोड़ी मोल बिच जायेगी । जीत गया तो परमेश्वरी तो छोड़ गिरदावरी भी करने नही मिल पायेगी । गर सेवा कल्याण मे चूक हुई और आखाड़े बाजो से न पटी, तथा पटरी न बैठी तो थारी काठी भी किसी कारागार में जरूआ खोसोओ के बीच नजर आयेगी । और थारी अन्तिम बूॅद भी थारे शरीर से बैभाव ही खीच ली जायेगी । 

भैयै - कै थारे को मालूम कोणी सत्ता का खेला होता ही ऐसा है गर थारे को सेवा कल्याण करना है तो इतना तो रिश्क उठाना ही पढ़ेगा और कुछ न कुछ तो दांब पर लगाना ही पढ़ेगा । गर थारे को इतना भी मुश्किल जान पढ़ता है तो तने भी जरूआ खोसोओ की जमात में शामिल हो जा और संघर्ष समाप्ति के इन्तजार कही ओट पकढ़ बैठ जा सुना काफी रत्न आभूषण मिलेगे ओर विरोध सहयोग के मुॅह मांगे दांम मिलेगे इतने पर थारी चल जायेगी । और रातो रात थारी माली हालत भी किसी साहूकार की तरह हो जायेगी । बोल भैया कैसी कही । 

भैया - मने जाड़ू कि थारा प्रस्ताव कोई घाटे का सौदा नही मगर कै करू सेवा कल्याण म्हारे डी एन ए मे कूट कूट कर भरा है बस अभी तक एक भी मौका नही मिला है । सो म्हारे को तो सिर्फ एक मौके की तलाश है साथ ही म्हारा विश्वास है कि एक बार तो लहर अवश्य आयेगी पार्षद पंचपरमेश्वरी मिले न मिले गर जरूआ खोसो बना रहा तो आगे अवश्य म्हारी लाइन किलियर हो जायेगी ऐसा म्हारे को म्हारे अखाड़े ने कहा है गर मने सफल हुआ तो मने जाड़ू गाड़ी भरा पुण्य भी म्हारे को ही मिलेगा । तब म्हारी मण्डली भी बैहरूपियो के भैस मे हर गांब गली ही नही नगर महानगरो में चमक रही होगी और धूम मचाती म्हारी मण्डली खूब फल फूल रही होगी । तब सेवा कल्याण की गर्जना होगी । मगर फूटी कोणी भी किसी को नसीब न होगी सिबाय सेवा भाव के। जय स्वराज । 


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