पिछड़ो का मसीहा बनने काॅग्रेस भाजपा आमने सामने

 

एक देश कानून बाले ही नही ,आरक्षण को पालने बाले भी मैदान में 

वोट की वैदी पर कोई होंम को तैयार नही 

वीरेन्द्र शर्मा 

14 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


माननीय न्यायलय के स्पष्ट मत के बाबजूद म.प्र. में पंचायत नगरीय चुनाव होगे या नही यह संसय अभी भी बना हुआ है मगर म.प्र. के दोनो ही प्रमुख विपक्षी दल सारे प्रदेश में प्रेस कान्फ्रेस कर यह सिद्ध करने की कोसिस में लगे है कि कौन कितना बढ़ा पिछड़ावर्ग का हितैसी है मगर यहां यक्ष सबाल यह है । इसमे एक दल तो वह है जो समुचे देश मे सभी के लिये एक कानून का पक्ष धर है तो दूसरा वह दल है जो आरक्षण की मिशाल ले खुद को झुलसा चुका है । आरक्षण हो मगर नियत पर शंका इस बात के संकेत है कि वोट की वैदी पर बड़े अनुष्ठान कर्ता के रूप मे अपना नाम तो चाहते है मगर हाॅम नही करना चाहते । अब इसके पीछे का मतव्य क्या है यह तो वही सियासी दल जाने जो सेवा कल्याण के नाम समाज को यहां तक ले आये है कि सेकड़ो बर्षो से साथ में स्नेह प्रेम से रहते चले आ रहै लोग एक दूसरे को बैमस्य भाव से देखने मजबूर हो रहै है । हो सकता ऐसे दलो की नजरो में वह मानव जीवन की श्रेष्ठतम कीर्ति स्थापित करना चाहते हो और स्वयं को धन्य करना चाहते हो । फिलहाॅल आम नागरिक संबैधानिक भावना की 5 बर्ष मे चुनाव हो और विगत 3 बर्षो मे चुनावो का न कराये जाने को लेकर व्यथित है । जिस पर माननीय न्यायलय ने भी संज्ञान लिया और चुनाव कराने के निर्देश दिये । मगर अन्दर खाने कि खबर यह है कि सरकार रिव्यू में गयी है । जिससे पिछड़ो के आरक्षण के साथ चुनाव हो ।  


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