श्रेय से दूर सामथ्र्य का प्रदर्शन


अधभुत पुरूषार्थ की शालीन व्याख्या 

दिशा तो ठीक है , अगर प्रयास , प्रदर्शन सार्थक रहा तो सर्बकल्याण मे दूर की कोणी साबित होगा निष्ठ योगदान 

विदेशी सरजमी पर सर्बकल्याण की दहाड़ 

व्ही. एस. भुल्ले 

4 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


आज समुचा बैबस विश्व विनाश की संभावना के बीच त्राहीमाम कर है और बड़ी ही आशा की नजरो से निदान के लिये भारत की ओर देख रहा है ऐसे में भारत का सर्बकल्याण में सार्थक प्रयास, प्रदर्शन इस बात का संकेत है । कि कुछ तो हस्ती है हमारी जो मिटटी नही, मिटाने से क्योकि सक्षम अधभुत पुरूषार्थ की जो शालीन व्याख्या विदेशी सरजमी पर जो देखने सुनने मिली वह किसी बड़े योगदान से कम नही , श्रेय दूर सामथ्र्य का प्रदर्शन ऐसा भी हो सकता है शायद ही किसी ने सपने मे सोचा हो मगर ऐसा हुआ । धन्यबाद के पात्र है हमारे प्रधानमंत्री और उनकी वह टीम जिसने ऐसी विकट परिस्थिति में सर्बकल्याण का स्पष्ट संदेश देने सार्थक परिश्रम किया जो सराहनीय ही कहा जायेगा धन्यवाद साधुवाद के पात्र है हमारे प्रधानमंत्री जिन्होने विदेशी सरजमी पर भारत की सर्बकल्याण में लीन उस महान संस्कृति संस्कारो को प्रमाणिक तौर पर दौहराया जो भारत का यथार्त है और भबिष्य भी है । उनके कनाडा उदबोदन की बात भले ही छोटी हो मगर उसके पीछे का जो भाव है वह निसंदेह जीवन के स्वराज का सपना पूरा करने मे दूर की कोणी साबित हो सकती है । अबोध बच्चो के बीच जाना उनसे इतिमिनान से बतियाना और उन्है व्यवहारिक संबल प्रदान करना इस बात के स्पष्ट संकेत है कि मजबूत भबिष्य से ही भारत का भबिष्य उज्जबल है । और बच्चे ही भारत का प्रमाणिक सार्थक भबिष्य है । मगर जो संदेश यूरोप की सरजमी पर सृजन मे मानव की उपायदेयता को लेकर प्रधानमंत्री जी ने दिया वह अधभुत था । और प्रमाणिक भी बहरहाॅल हम कह सकते है । कि अब सिर्फ भारत ही नही भारतीय संस्कृति संस्कारो का जो तैज है या था वह जीवन में आज भी सार्थक है और भबिष्य में भी रहने बाला है । जरूरत उस विरासत को सम्मान स्वाभिमान के साथ आगे ले जाने कि है जो हमारा अस्तित्व ही नही आधार रहा है और यही कई बर्षो बाद विदेशी सरजमी पर पूरी शालीनता के साथ सिद्ध रहा है काश इस सच को हमारी मौेजूद पीढ़ी समझ पाये तो यह इस महान भारत बर्ष के हर भारतबासी का नागरिक होने के नाते सच्चा और सार्थक योगदान होगा । जय स्वराज । 


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