म.प्र. में हो , गौलोक की स्थापना
भव्य दिव्य विरासत बचाने सभी का सार्थक योगदान अहम
मूल से विमुख , समृद्ध खुशहाॅल जीवन , असंभव
श्रेष्ठतम संस्कारो का प्रतीक है , गौवंश
धमेंद्र सिंह गुर्जर
6 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
जीवंत शिक्षा , स्वस्थ समृद्ध स्वाभिमानी सर्बकल्याण मे निहित जीवन को अपने वैचारिक आधार से समय पर समय प्रोत्साहित करने बाले स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ने अपने भ्रमण कार्यक्रम के दौरान मौजूदा हालात पर अपने अपने नैसर्गिक कर्तव्य निर्वहन की महत्वता पर चर्चा करते हुये कहां कि संतोष का विषय है कि कुछ तो हो रहा है मगर परिणाम तब तक प्राप्त नही हो सकते जब तक की मानव अहम अहंकार छोड़ स्वयं के मूल को बचाने बड़े पैमाने पर सार्थक प्रमाणिक प्रयासो की सार्थकता सिद्ध नही कर लेता । दुर्भाग्य यह है कि मूल से इतर जीवन की सार्थकता सिद्धता तो , अपनी अपनी समझ अनुसार सभी चाहते है और लोग कर भी रहै है । मगर समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मूल क्या है इस पर तनिक भी विचार नही करना चाहते । उनके लिये समझने योग्य बात यह है कि वह अपने अपने सामथ्र्य पुरूषार्थ से अकूत धन दौलत , महल , कोठिया जहाज , कारो का बैड़ा खड़ा कर बड़े बड़े मल्टी स्पेशलिटी हाॅस्पीटल मैहगी दवाये मशीनरी खड़ी कर सकते है मगर वह स्वस्थ शरीर , मन का शुकून अकूत दौलत से नही खरीद सकते न ही शरीर में पैदा किसी गंभीर बीमारी में होने बाले दर्द को कम कर सकते है और न ही ऐसा कोई उदाहरण हमारे सामने है । बल्कि मानव जीवन के ऐसे कई प्रमाण है जो यह सिद्ध करने काॅफी है कि सत्ता की सारी ताकत , करोड़ो शुभचिन्तको , चोटी की स्वास्थ सेवा मशीनरी और अकूत दौलत के साथ ही एक से बड़कर एक बलशाली समृद्ध , सामथ्र्यशाली वीर प्रियजन , सहजन , परिजनो के बीच दर्द और बैबसी का एहसास सिर्फ उस शरीर या जीवन को ही होता है जिसके आढ़े कोई चीज काम नही आती ।और सारा धन , सामथ्र्य , समृद्धि किसी काम की नही रह जाती । जो निसंदेह उस समृद्ध जीवन से विमुखता का ही परिणाम होता है । जिससे विमुख आज भी करोड़ो अरबो जीवन अपनी सार्थकता सिद्ध करने मे जुटे । बहरहाॅल सबाल कई हो सकते है उन मौजूद जीवनो के बीच अपनी अपनी समझ अनुसार सहमति असहमति हो सकती है । मगर समृद्ध जीवन की भव्य दिव्य विरासत और जीवन के श्रेष्ठतम संस्कारो के प्रतीक हमारे गौवंश आज कष्ट में उन्है अब गौशाला कांजीहाउस या अभ्यारण नही गौलोक की आवश्यकता है और इसकी शिरूआत अगर म.प्र. से होती है तो यह म.प्र. केे लिये गर्व गौरव की बात होगी । क्योकि गौवंश ही स्वस्थ समृद्ध शिक्षित, जीवन का मूल है जिससे सामथ्र्य का विमुख होना किसी ओर से नही स्वयं मानव जीवन उसकी समृद्धि से द्रोह है । उस महान संस्कृति , शिक्षा , संस्कारो से द्रोह है । उस भव्य दिव्य विरासत से द्रोह है जिसके अभाव में आज जीवन खण्ड खण्ड हो दुर्दशा का शिकार होने बैबस मजबूर है । काश इस सत्य को जितनी जल्द हम समझ इसमें सुधार कर सिर्फ मानव जीवन ही नही पृथ्वी पर मौजूद लाखो करोड़ो जीवनो को समृद्ध खुशहाॅल बना पाये तो यह मानव जीवन की बड़ी उपलब्धि होगी । उन्होने अन्त में कहा कि यह हर मानव के अहम योगदान का वक्त है । और सर्बकल्याण में सबसे बड़ी जबाबदेही भी मानव जीवन की ही है । इसलिये हर मानव को मानव के रूप में अवश्य कर्तव्यनिर्वहन के माध्ययम से अपना अमूल्य योगदान करना चाहिए । फिर उनका कार्यक्षैत्र जो भी हो । जय स्वराज ।

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