इनायत नजर से पूर्व पुख्ता इन्जाम

 

कैसे लगेगी भ्रष्टाचार पर लगाम 

झारखण्ड के गड़बड़ झाले से एलर्ट मोड पर शासन 

जांच ऐजेन्सियो की हरकत पर म.प्र. में लगाम .......? तीरंदाज 

व्ही. एस. भुल्ले 


8 मई विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

भैया - बड़े पैमाने पर नोट गिनने मशीन लेकर पहुॅचने बाली जांच ऐसेन्सियो पर मानो म्हारे महान प्रदेश में तो पुख्ता इन्तजाम हाथो हाथ हो लिया है । सुना है शासन का फरमान है कि अब म्हारे चोटी के या नम्बर एक माईबापो की शिकायत से पूर्व म्हारे प्रदेश के मुखिया से लेनी होगी । बुरा हो करोड़ो नोट गिन मशीनो के जबरदस्त प्रदर्शन कर हमारे माईबापो को हैरान परेशान करने बालो अगर झारखण्ड से गड़बड़झाले की खबर और करोड़ो की अकूत खबरचियो ने न दिखाई होती आज इस तरह म्हारे माईबापो को एलर्ट मौड पर आ अलसुबह ही भ्रष्टाचार की शिकायतो का पिटारा लेकर घूम रहै बिघन संन्ताषियो पर लगाम न लगाई होती अब तो म्हारे को यह सक खुली आॅखो सता रहा है कि खाउॅगा न खाने बालो कि टोली आने से पूर्व ही मोर्चा बाजी सुरू हो ली । 

भैयै - बाबले कै थारे को मालूम कोणी भाई की नजर बड़ी गहरी है । सो उसकी नजरो से बच पाना मुश्किल ही नही नमुमकिन सा लगता है मगर देखना होगा कि भाईयो कि इनायते नजर म्हारे प्रदेश पर कब पढ़ती है । बैसै बड़े पैमाने पर बड़ी खैप नोटो की बरामदगी म्हारे प्रदेश के ही माईबापो के यहां हुई थी सो सौन तो पहले ही हो लिया मगर सुनने है इस बार आग कि आंच झारखण्ड के मुखिया को भी झुलसा रही है यही कारण है कि पहले ही कोटा सुरक्षित कर लिया जाये तो हर्ज ही क्या है । बैसै भी विघनसंताषियो का अखाड़ा तो यही है और इससे पूर्व भी चिल्ला चोट करने बालो ने क्या उखाड़ लिया । 

भैया - अपने सामथ्र्य और पुरूषार्थ पर इतना अहंकार ठीक नही क्योकि भक्त का नारा है कि भाई है तो मुमकिन है सो कुछ भी मुमकिन हो सकता है सो ऐसी गलत फेहमी पालना ठीक नही भाई ने कह दिया है न खाउगा न खाने दूगा सो तने भी लोेक कर ले कभी भी कुद भी हो सकता है । 

भैयै - मुये यह हमारा अखाड़ा मोर्चा है जिसमें घुसपाना इतना आसान नही और अगर घुस गये तो निकल पाना नमुमकिन है सो थोड़ा कहा बहुत समझना । 

भैया - मने जाड़ू थारी जुगाड़ मगर कै करू म्हारा दर्द तो म्हारे माई बापो को लेकर है जो बैचारे दिन रात एक करने के बाद भी चैन की सांस नही ले पा रहै उस से विघसंतोषियो की अड़ी बाजी कलैजा मुॅह को लाती है मने ठहरा गांब गबई मने केै जाड़ू सियासी हथियारो को कि कौन कितना विधवंशकारी है सो मने तो खुश हुॅ रोज रोज कि चकल्लस पुख्ता इन्तजाम तो हो लिया । कम से कम रोजाना कि खाज खुजली से तो मुक्ति मिली । शिकायती को विराम अब जब स्वयं मुखिया आगे और म्हारे माईबाप पीछे तो किसकी मजाल है जो यह जुर्ररत कर सके और म्हारे माई बापो की निष्ठा पर सबाल खड़े कर सके । जय हो भय भूख भ्रष्टाचार मुक्त शासन की । 


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