बहुमत के आगे बिलबिलाता जीवन


अहंकारी अशिक्षित असंस्कारी अंधी आस्थाये

 अंजाम भोगती बैबस आशा अकांक्षाये 

बिमुख , कर्तव्य जबाबदेह जीवन से थर्राई , मानवता 


व्ही. एस. भुल्ले 

12 जून 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

बिमुख कर्तव्य जबाबदेह जीवन क्या कभी इतना वीभत्स होगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा कि मानवता के शंकनाद के बीच जीवन इस तरह से थर्रा बैबस आशा अकांक्षाओ पर बिलाप कर बिलबिलायेगा जहां न्याय का आधार सिर्फ और सिर्फ बहुमत ही सिद्ध होगा । कारण अहंकारी शिक्षित असंस्कारी आधी आस्थाओ से घिरा जीवन जिसे न तो उन महापुरूषो की त्याग तपस्या न उन कर्तव्य निष्ठ महापुरूषो की कृतज्ञता ही अब काम आ रही और न ही वह अब कुछ करने की स्थति में है सिबाय एक ऐसे बैबस जीवन के जो न तो उसका प्रारब्ध कहा जा सकता न ही नियती क्योकि इतिहास गबाह है इतिहास मे हजारो ऐसे उदाहरण है जहां कर्म ज्ञान की पराकाष्ठा ने सिर्फ मानव जीवन ही समुचे जीव जगत को वह समृद्ध विरासत रख छोड़ी थी जिसका दौहन करते करते आज हम एक ऐसे मुकाम पर आ पहुॅचे जहां हमारे पास अपनी कृतज्ञता जीवन के प्रति सिद्ध करने का कोई प्रमाण नही । ऐसे में हम न तो उस समृद्ध सृजन के लिये सिद्ध हो सके न ही अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित जिसके लिये मानव के रूप मे हमारा अस्तित्व आधार है । मगर आज गर्व की बजाये हम शर्म मेहसूस कर सकते है । कारण हमारे परिणाम जीव जगत के हित में सिद्ध हो रहै न ही हमारे अपनो के हित में बड़े अफसोस के कह सकते हम कि न तो हम इतिहास से कुछ सीख सके न ही अपनी समझ से कुछ ऐसा कर सके जिससे पर हमारी मौजूद या आने बाली पीढ़ी गर्व कर सके क्योकि हम समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मार्ग प्रस्त करने मे अक्षम असफल सिद्ध हुये । जिसके रूझान अब आना शिरू हो चुके है । हर 5 बर्ष होने बाले सेवा कल्याण के कुंभ मे वैधानिक प्रक्रिया से नये नये मुखिया चुने जाते है आशा अकांक्षाओ को उम्मीद होती है कि अब उनका कल्याण होगा मगर ऐसा नही हो सका कारण वही अंधी आस्था अज्ञानता जो अब नासूर समृद्ध जीवन की सबसे बढ़ी बाधा सिद्ध हो रही है अब सबाल यह उठता है अगर कल्याण सेवा का आधार बहुमत है जहां सबसे आधार बराबर है सर्बकल्याण की जगह स्वकल्याण मे गहरी आस्था प्रबल तो कैसै कल्याण होगा जो समस्त जीवनो के बीच आज यक्ष सबाल है जिसका जबाब जल्द न खोजा गया समृद्ध जीवन एक अबूझ पहली के अलावा शेष कुछ सिद्ध होने बाला नही इस पर जितनी जल्द विचार हो उतना ही जीव जगत ही नही मानव जगत के हित में होगा काश श्रेष्ठजन ऐसा कर पाये तो समृद्ध जीवन का मार्ग प्रस्त होने में कोई कारण ऐसा न होगा जो एक समृद्ध समाज पर या हमारी श्रेष्ठता पर सबाल खड़े कर सके । जय स्वराज । 


 


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