नैतिक पतन की बारूद से खेलती आस्थाये
सार्बजनिक शास्त्रार्थ का अभाव , विद्या विद्ववानो के अपमान से जूझता समृद्ध जीवन आधार
निरंकुश विद्या चोर संस्कृति ने किया सत्यानाश
प्रबन्ध के आगे दम तोड़ती आशा अकांक्षाये
सृजन से अनभिज्ञ , भयभीत सत्ताये सर्बकल्याण में हमेशा अक्षम असफल सिद्ध हुई है । इतिहास साक्षी है
व्ही. एस. भुल्ले
24 जून 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
कहते जीवन जहां भी हो जैसा भी हो जब तक वह अपनी नैसर्गिक प्रमाणिकता सिद्ध नही कर लेता तब वह अपने आधार अस्तित्व का मोहताज बना रहता है । मगर उसकी प्रमाणिकता आधार अनादिकाल से उसका प्रदर्शन और परिणाम ही रहा है । सृजन , विद्या ज्ञान से अनभिज्ञ भयभीत सत्ताये सर्बकल्याण मे स्वयं को सिद्ध करने इसलिये अक्षम असफल होती रही कि वह सृजन सिद्धान्त अनुरूप न तो खुद के साथ न्याय कर न ही वह न्याय के लिये स्वयं की उपायदेयता सिद्ध कर सकी और आती जाती रही हजारो बर्ष का ज्ञात अज्ञात इतिहास इस बात का गबाह है कि जब जब जीवन का नैतिक पतन हुआ उसे बारूद की तरह किसी बड़े बिस्फोट का सामना करना पढ़ा है आज जब आस्थाये एक मर्तवा फिर से बारूद से खेल रही है और प्रबन्ध के आगे आशा अकांक्षाये दम तोड़ रही है । उसका मूल वही विद्या चोर निरकुंश संस्कुति है जो समृद्ध खुशहाॅल जीवन का अनादिकाल से विनाश करती आ रही है । और प्रतिभाओ का प्रदर्शन आज भी अनाथ है । एक समय होता था जब सत्ता मे शासक जो भी हो व्यवस्था मे जबाबदेह लोग जैसै भी हो मगर उनके आचरण व्यवहार में उन आशा अकांक्षाओ का भय नैतिक आचरण व्यवहार को लेकर अवश्य होता था और वह अंगीकार व्यवस्था अनुसार बगैर किसी भय के न्याय करने में आस्था और विश्वास रखते थे । जिससे सर्बकल्याण का मार्ग अवरूध न हो और आने बाली पीढ़ियाॅ उनसे सीख ले समृद्ध जीवन के मार्ग को सुनिश्चित करने मे संकोच न करे और नई नई विद्याओ को संरक्षण दे विधाविधवानो के मार्गदर्शन मे समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मार्ग प्रस्त कर सके । मगर विधि विधान मे आस्था रखने बाले जीवन मे हम उन प्रतिभा विधा विद्ववानो को सुरक्षा संरक्षण देने मे अक्षम , असफल सिद्ध हुये जो समृद्ध जीवन का आधार है । अब सबाल यह है कि आज जब हम जनतंत्र लोकतंत्र के आधार है और समृद्ध खुशहाॅल जीवन का लक्ष्य हमसे कोसो दूर तो ऐसे मे मानव जीवन के रूप में हमारी क्या उपायदेयता हो सकती है विचार हमें इस पर करना चाहिए जो इस पर विचार कर विद्याविधवानो को संरक्षण संबर्धन देने मे सफल सिद्ध हुये निश्चित ही वह उन लोगो का आधार हो सकते जो समृद्ध खुशहाॅल जीवन चाहते है मगर ऐसा हम न कर सके यह संभव नही बशर्ते भयमुक्त आस्था विश्वास का माहौल बने और जैसै भी हो हम उन विद्या विद्ववान प्रतिभाओ को ऐसे मंच मुहैया करा सके जहा वह अपने प्रतिभा प्रर्दशन और विधा से समुचे मानव समाज को सृजन आधार अनुरूप श्रेष्ठतम प्रमाणिक वो प्रमाण दे सके जिससे सर्बकल्याण सुनिश्चित हो सके यही मानव जीवन के रूप मे हमारी एक बड़ी सफलता होगी । हमें यह नही भूलना चाहिए कि हम उन महान विभूतियो के उत्ताराधिकारी है जिन्होने अपने पुरूषार्थ के बल समृद्ध खुशहाॅल होने कि कीर्ति स्थापित कर एक समृद्ध विरासत हमारे लिये छोड़ी थी जिसे लूटने न जाने कितने आये कितने गये कितने क्या क्या लूट ले गये अब क्या शेष है सब हमारे सामने है । और वह हमारे ही पूर्वज थे जिन्होने हमे बगैर स्वयं की परवाह किये अनगिनत कुर्बानियो के बाद यह समृद्ध विरासत सौपी है । गर हम यह महान विरासत को नही सम्हाल सके तो निश्चित ही हमारी आने बाली पीढ़ियाॅ हम पर गर्व नही बल्कि हमारी कीर्ति देख सुन हमें लज्जित करेगी । उदगम पतन का खेल तो चलता रहेगा मगर हम भबिष्य मे किस रूप मे जाने जायेगे इस पर हमे अवश्य विचार करना चाहिए । जय स्वराज ।
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