जन की खातिर जुनून की जंग 

तबाह तंत्र में गिड़गिड़ाते लोक 

स्वकल्याण की सुनामी में सेवा कल्याण अनाथ 

व्ही. एस. भुल्ले 


9 जून 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

स्वकल्याण की सुनामी में अनाथ हुये सेवा कल्याण को नाथ कब और कैसै नसीब होगा यह तो भबिष्य की बात है मगर तबाह तंत्र मे जिस तरह से लोक गिड़गिड़ाने पर बैबस मजबूर है वह किसी भी लोकतंत्र के लिये दुखद ही कहा जायेगा । फिलहाॅल तो गली मोहल्लो से लेकर गाॅब गाॅब तक जन की खातिर जुनून की जंग छिड़ चुकी है । जिसके हालिया रूझान से साफ है कि यह सेवा कल्याण की जंग जिसमें स्थानीय सरकारो के मुखिया सभासद सदस्यो को चुना जाना है । इतनी आसान नही रहने बाली है जैसा की चुनाव कराने बाली संस्थाये मान कर चल रही है । एक मार्डर एक फर्सा लुहागी से सर फाड़ने की घटना यह समझने काॅफी है कि मुकाबला किस स्तर तक होने बाला है । ये अलग बात है कि सिस्टम के निष्पक्ष चुनाव कराने के दावे है तो वही स्वकल्याण में डूबे उन कर्णधारो के अपने दावे है । मगर तंत्र के आगे जिस तरह से लोक बर्षो बर्षो से गिड़गिड़ाने पर बैबस मजबूर है वह किसी से छिपा नही लाखो की पगार लग्झरी सुबिधाओ से लैस सिस्टम का आलम यह है कि पौ फटने के साथ मोबाइल बाॅटसब पर आने बाले मैसैज वीडियो कांफ्रेन्स से लेकर जूम बैठको की बाढ़ हार्ड साॅफट काॅफी मे जानकारियो का अंबार यह सिद्ध करने काॅफी है कि कैसी सेवा कल्याण का दौर आज चल रहा है कोई किसी की सुनने तैयार नही ऐसे मे उन दीन हीनो को कौन समझाये कि अब सेवा कल्याण सिर्फ सेवा कल्याण ही नही आम लोगो से कोसो दूर जा चुका है । दशको के सेवा कल्याण के पहाड़ के बाबजूद समस्याओ का अंबार आखिर क्या सिद्ध करता है । जिन स्थानीय सरकारो के चुनावो मे जीत को गाॅब गली तक सियासी तलबारे खिची हुई है वह हर पाॅच बर्ष मे चुनी जाती रही है मगर समाधान के बजाये खुशहाॅल जीवन मे व्यवधान सिद्ध हो रही है मगर लोकतंत्र का तकाजा है सो वोट भी मांगे जायेगा और निष्पक्ष चुनाव भी होगे और वोट डलने के बाद हार जीत का फैसला भी होगा अगर कुछ शेष रह जायेगा तो समृद्ध खुशहाॅल जीवन की खातिर वह दुसबारिया जो अब समाज और सिस्टम मे गहरी पैठ जमा चुकी है । इसलिये किसी भी प्रकार की अपील या आगाह करना मूर्खता ही कहा जा सकता है । बस शान्ति पूर्ण निष्पक्ष चुनाव और हार जीत के आंकड़े ही आज की स्थति मे बैहतर बिषय हो सकता है । जो आज की स्थति मे सच्चा कर्तव्य निर्वहन सिद्ध हो ऐसी कल्पना आज हर भले व्यक्ति को अवश्य करना चाहिए । जय स्वराज । 



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