वीर लड़ता है , भावुक बोल पर द्रवित भावना ........?


नेक दिल इन्सान कि जुबानी , भावनाओ की कहानी 

नेता के बोल पर कार्यकर्ता के आंशू 


मसला ग्वालियर चंबल का 

वीरेन्द्र शर्मा 

11 सितंबर 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

मसला जनसेवा का हो जंगे मैदान का वह दिल ही होता है जो दिमाग तक अपना असर छोड़ता है फिर प्रसंग जो भी हो मगर आज कि सियासत में इसके क्या मूल्य शेष रहै है । यह भी किसी से छिपा नही इतिहास गबाह है लड़ाका न तो कभी थके है न ही कभी रूके है और न ही कभी डरे है फिर कीमत जो भी रही हो मगर अपने हमेशा साथ रहै है क्योकि उनके लिये जन जीवन मात्रभूमि सर्बोपरि रही है । और इसकी रक्षा वह अपना धर्म कर्म भी अनादिकाल से समझते समझाते रहै है । गंगेज से लेकर चाड़क्य और पृथ्वी राज से लेकर वीर छत्रपति शिवाजी वाजीराव , माहतजी , सदाशिव और भगत सिंह से लेकर लाला ,लाल बाल पाल तक एक बड़ी श्रंखला रही है । राष्ट्र् जनसेवा के लिये मर मिटने कि मगर जब आज हम जनतंत्र में है तो आज जंग का स्थान संघर्ष ने ले रखा है । संघर्ष लंबा भी हो सकता है और तनाब पूर्ण भी सफलता मिल भी सकती और नही भी मगर जो यकीकन तौर पर सर्बकल्याण के लिये संघर्ष होता है वह जीवन को आत्मसंतोष और जीवन के प्रति शांति अवश्य प्रदान करता है जो जीवन के समागम के वक्त बड़ा संबल और संतोष प्रदान करता है । कई बर्षो बाद एक मर्तवा फिर से सियासी दुनिया में यह शब्द आया कि में रहुॅ या न रहुॅ इसलिये हर जीवन को अपने जीवन मे सर्बकल्याण के पुख्ता काम अवश्य होना चाहिए । कम से उनका लाभ आम जीवन को 100 बर्ष तक तो मिले अब इस आत्मीय चर्चा का उदेदश्य जो भी रहा हो मगर इस श्रवण ने कुछ लोगो को तो अन्दर तक झंझकौर दिया । ये अलग बात है कि इस भावना का ऐहसास उस दिल को हो या न हो मगर हजारो लाखो दिल ऐसे है जो आज भी निसंदेह उस सच के लिये धड़कते है इस साधन संपन्न सियासत में उनकी अपनी बैबसी लाचारी हो सकती है मगर कहते दिल कभी बैबस लाचार नही होता आज जिसके लिये दोषी न होने के बाद भाई लोग उस शख्सीयत को दोषी करार दे  आज भी सियासी जुगाली करते है । मगर यथार्त से दूर होना वीरता पराक्रम की निशानी नही हो सकती बल्कि , सामथ्र्य के बल स्वयं को  सिद्ध करना ही जीवन की सिद्धता कही जा सकती है कहते है  दिल ही वह संबल होता है जीवन का जो यथार्त भी होता है और आत्मा के निकट भी और इतिहास गड़ने में जीवन की मदद भी करता है । जिसकी कृतज्ञता को जनहित में कुछ बर्ष तक नही बल्कि पीढ़ियो तक याद किया और सराहा जाता है । जय स्वराज । 


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