घटिया सड़को पर मोटी उगाही
तार तार नैतिकता दम तोड़ता विश्वास
बैध अबैध उगाही से थर्रायी मानवता
टोल और बैरियरो की आढ़ में चल रहा है गोरख धंधा
वीरेन्द्र भुल्ले
27 नबम्बर 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
अब टोल राज्य सरकार के हो या केन्द्र के अधिनस्त एन एच ए आई के , सड़को के भले ही पर खच्चे उड़ रहै हो और पुल पुलिया दरक रहै हो या फिर एक साइड से मेन्टीनेन्स के नाम रास्ते बन्द पढ़े रहते हो मगर अगाही का आलम यह है कि वह कभी भी रूकने का नाम नही लेती , अगर सूत्रो कि माने तो सड़क निर्माण से लेकर उगाही तक का कार्य कोई न कोई ऐजेन्सी ही करती है वह भी अच्छी सड़को की और अगर सड़क इस दौरान खराब है तो रख रखाव का कार्य भी इन्ही को करना होता है । या फिर सरकारो को कराना होता है । क्योकि सरकारे भी परिवहन के नाम अच्छा खासा
टैक्स बसूलने से पीछे नही रहती । जिसमें परिवहन चैक पोस्ट इसलिये है कि टैक्स की चोरी न हो सके । और आॅव्हर लोड वाहन सड़को पर न दौड़ सके । फिर नगर या बड़े बड़े शहरो के बाहर या वायपास ट्र्ेफिक कानून का पालन या कानून का उलंघन न हो उसके लिये भी सरकारी नुमायेदे तैनात रहते है जो लंबी लंबी कतारो के बीच कानून का पालन कराने का कार्य करते देखे जा सकते है । मगर हद तो तब हो जाती है जब अच्छी सड़को के नाम घटिया सड़को से वाहन मालिको या वाहन चालको गुजरना पढ़ता है । या फिर बैरियरो पर पठानी बसूली का शिकार होना पड़ता है । या फिर खराब सड़को पर अच्छी सड़को की कीमत टैक्स देने तथा अन्य टैक्सो के माध्यम से जबाबदेहो कि मोटी मोटी पगार लग्झरी वाहन कोठियो की सुबिधा मुहैया होने के बाबजूद लोगो को खरब सड़को दरकते पुलो केे फैर मेें सड़को पर होने बाली दुर्घटनाओ में अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है । या घायल अबस्था में मदद को तरसना पड़ता है । अगर हम देखे तो आय दिन टोल नाको पर होने बाली मारपीट , कानून के दरवाजे खड़े रहने बाले बाहन या सड़को पर चेकिग के नाम वाहनो कि कतारे नगर शहर या फिर परिवहन चैक पोस्टो पर आय दिन देखी जा सकती है । ऐसा नही कि दर्द से जबाबदेह अनभिज्ञ हो मगर मगर पठानी सिस्टम में हिम्मत किसकी जो मुॅह खोल जाये । म.प्र. होकर यूपी जाने बाले वाहन चालको ने नाम छापने कि शर्त पर हमारे संवाददाता को बताया कि खरई और सिकंदरा चैक पोस्ट यह नजारा आम है यह दोनो ही चैकपोस्ट यूपी और राजस्थान सीमा पर जो शिवपुरी जिले का भाग है । तो म.प्र. का सबसे कुख्यात टोल पूरनखेड़ी है जहां आय मारपीट के साथ कई जघन्य घटनाये हो चुकी है रहा सबाल जिस आगरा मुंबई मार्ग पर यह टोल है उस सड़क पर बनने के साथ ही मैन्टीनेन्स चलता ही रहता है पहले उट पुल पुलिया अब उधढ़ती सड़के इस बात का प्रमाण है । कि किस हद तक नैतिकता तार तार होती जा रही है । जिसने आम वाहन मालिको का ही नही आम वाहन चालको का सड़क पर चलना दर्दनाक बना दिया है । काश सरकारे चुनावो से इतर इधर भी संज्ञान ले जिससे जो आशा अकांक्षा आम नागरिको को अपने द्वारा चुनी हुई सरकारो से होती है उन्है वह फलीभूत देख स्वयं पर शर्म करने के बजाये गर्व मेहसूस कर पाये ।
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