नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान 

मोहब्बत का अलख जगाने पैदल दिल्ली पहुॅचे राहुल 

कोरोना और कन्याकुमारी से काश्मीर तक भारत जोड़ो


सियासी भूचाल पर उठे गंभीर सबाल 

वीरेन्द्र भुल्ले 

24 दिसंबर 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

हरियाणा के मंच से नफरत के बाजार मे मोहब्बत की दुकान ने भले ही सियासी गलियारो मे भूचाल ला दिया हो मगर कोरोना को लेकर जो खबरे हालिया तौर पर जो हवा में है वह निश्चित ही आम जन जीवन को एक मर्तबा फिर से डराने भयभीत करने बाली है । क्योकि कोरोना का कहर और जीवन की तबाही का मंजर सिर्फ भारत या भारत किसी राज्य जिला , जनपद ही नही गांब गली ने अपनी बैबस पथराई आॅखो से देखा से देखा और कोरोना के कहर को विश्वबिरादरी ने भी झेला है । उन लोगो ने भी बैबस अन्दाज में इसे देखा है जो चिकित्सिय क्षैत्र के खुद को सूरमा समझते थे । ज्ञान विज्ञान तकनीक से सुसज्जित वह श्रेष्ठजनो की फौज उन्है भी नही बचा सकी जो उनके अपने थे कोरोना कहर से मौत और लाशो के ढेर शायद सभी ने कही न कही देखे है । मगर हालिया जो खबर है कि जो कोरोना बैरियेंट हालिया तौर पर विदेशो में सक्रिय है वह बड़ा ही खतरनाक है । और संक्रमण की रफतार भी इसकी तेज है । बहरहाॅल डर भय के को भगाने मॅहगाई , बैरोजगारी , और नफरत को मिटाने देश में चल रही लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी पैदल पदयात्रा कन्याकुमारी से शुरू हो दिल्ली सकुशल पहुॅच चुकी है । जो अभी तक लगभग 3000 कि.मी. का पैदल सफर कर चुकी है इस यात्रा का नेतृत्व कर रहै काॅग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहूल गाॅधी ने हरियाणा के मंच से कहा कि वह नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोल रहै है । मगर वह साथ यह कहना भी नही भूल रहै कि प्रेस बाले मेरे मित्र है में उनकी मजबूरी समझता हुॅ मगर देश मे भारत जोड़ो को उतनी जगह न मिल पाना जितने की वह हक दार है यह देश ही नही समुची मानव सभ्यता के लिये उचित नही शायद उनके उदवोधन का यही भाव रहा हो इस बीच वह यह भी दोहराते है कि यात्रा को कोई नही रोक सकता । अर्थात वह कन्याकुमारी से शुरू की यात्रा को हर हाॅल में पूर्ण करेगे । मगर 3000 कि.मी. तक सिर्फ एक पैंट टी शर्ट मे यात्रा कर कड़कड़ती सर्दी में दिल्ली पहुॅचने बाले राहुल निश्चित ही देश बासियो का प्रेम स्नेह देख काॅफी उत्साहित है इसलिये वह अपने भाषणो में यह भी दोहराते है कि उन्है इतनी लम्बी पैदल यात्रा के बाद कोई थकान नही न ही उनके साथ चल रहै सह यात्रियो में कोई थकान है । मगर जोड़ने पैदल निकले राहुल ने सिर्फ टीशर्ट में दिल्लीतक पहुॅच लोगो को सोचने पर मजबूर अवश्य किया है । कि वह कितने दृढ़ है अपनी जबाबदेही को लेकर बहरहाॅल इस यात्रा के परिणाम जो भी हो मगर सियासी भूचाल देश की सियासत में देखा जा रहा है । वह किसी सियासी संनाटे से कम नही । क्योकि यह वह यात्रा है जो सिर्फ काॅग्रेस ही नही देश की सियासत में भी बहुत कुछ करने बाली है । 


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