सियासी विरासत पर सायलेन्ट संग्राम

 

लकीर भले ही लम्बी हो मगर खतरा बरकरार 

सियासी दरकार और दांव पर समृद्ध निजाम 

वीरेन्द्र भुल्ले 


6 जनवरी 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

जिस तरह का सियासी संग्राम फुल सायलेन्ट मोड पर म.प्र. में चल रहा है वह न तो सक्षम सफल समृद्ध सियासी दलो के हित में है । न ही उन दलो के हित में है जिन्है यह उम्मीद है कि सत्ता का रसगुल्ला उसके ही मुॅह में एक हवा के झोके से गिरने बाला है । फिर लकीर कोई कितनी ही लम्बी क्यो न खीच ले । क्योकि सियासी दरकार है कि निजाम बदलना चाहिए । और यह सुगबुहाहट कोई खाली पीली नही अबाजे तो उठ ही रही है । फिर यह हल्ला अपनो का हो या परायो का या फिर आम आशा अकांक्षा की आशा हो । क्योकि जिस तरह से निजाम सरपट दौड़ रहा है उसे दौड़ाने बालो को यह मुगालता भलेे ही हो कि सब कुछ उनकी मंशा अनुसार ही हो रहा है क्योकि आधे से अधिक सस्ते राशन , स्वास्थ , जल , बिजली की पुख्ता आम जरूरतो से जूझ रहै हो या फिर निजाम कि आढ़ में गाहै बगाहै विधि संबत या पठानी बसूली से जूझ रहै हो जो किसी भी निजाम की उपलब्धि कहै जा सकते है मगर आम जन जीवन खुश नही । ऐसे दरकार का पक्ष मजबूत होना स्वभाबिक है । अगर ऐसे में समृद्ध निजाम दांव पर लगता है तो किसी अतिसंयोक्ति नही होनी चाहिए । भले ही सियासी लकीर कितनी ही लम्बी क्यो न हो , सियासी सरोकार कितने ही लम्बे क्यो न हो निजाम पर खतरा होना स्वभाबिक है । क्योकि अलग अलग झुण्ड मेें सत्तासुख के लिये शिकार करने बालो शिकारियो को आज भी यह मुगालता है कि उनकी रणनीत पर किसी की नजर नही और उनका कांरबा ऐेसे ही बैरहम शिकार कर उन्है सत्ता में बनाये रखेगा अगर खबर सही है तो बड़े शिकारियो कि अब इन झुण्डो पर ही नजर है और समय भी उनके साथ अगर ऐसे में सर्बकल्याण की खातिर किसी की बली लगती है तो किसी को कोई अचंभित होने बाली बात नही होना चाहिए । हो सकता है सियासी पण्डितो को और कुछ इन्तजार करना पढ़े मगर अब जो भी होगा वह सर्बकल्याण में हितकारी ही होगा ऐसी उम्मीद हर उस आशा अंकाक्षा को करनी चाहिए जो सर्बकल्याण के नाम इस तरह की सियासत के शिकार हो अपने समृद्ध जीवन की होली जलते देखते रहै है । शायद उन्है कुछ शुकून मिल पाये फिर बात इधर की हो या उधर न्याय की उम्मीद तो की ही जा सकती है । जो सार्थक भी हो सकती है और सिद्ध भी । जय स्वराज । 

 

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