सांस्कृतिक , संस्कारी , त्रासदी का शिकार समृद्ध जीवन
नैतिकता हुई बांझ
श्रेष्ठ शिक्षा , ज्ञान , संस्कारो से समृद्ध जीवन की दुर्दशा
ग्रंथो की प्रमाणिकता ही नही , श्रेष्ठ सोच संस्कारिक व्यवहार है हमारा मजबूत आधार
व्ही.एस.भुल्ले
14 मार्च 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
आज भले ही हम जी 20 के अगुआ हो और ऐसे मे अवसरो के अपार भण्डार हो मगर आज जिस बसुधैवकुटुम्बकम के नारे के साथ इस महान भूभाग का जीवन एक मर्तवा फिर से आगे बढ़ रहा है वह भी न जाने कितने सेकड़ो बर्ष बाद निश्चित ही विश्वविरादरी मे मौजूद आम जीवन को अचंभित करने बाली घटना आज भले ही न हो मगर भबिष्य बताता है कि आम जीवन आने बाले समय में उस समृद्ध संस्कृति , संस्कारो , शिक्षा , ज्ञान से अछूता नही रहैगा जिस समृद्ध श्रेष्ठ नैतिकता का मजबूत आधार मानव जीवन का टिका होता है जिसे हम मानवता या मानव धर्म के रूप में जानते है ।
यह सही है कि सेकड़ो बर्षो की त्रासदी झेलते हुये उस महान समृद्धि का सांस्कारिक , सांस्कृकि हास बढ़ी त्रासदी के रूप में आज भी मानव जीवन के सामने है जिसे नाम कोई कुछ भी दे सकता है मगर हकीकत यह है कि हमने उच्च नैतिक मूल्यो कि सेकड़ो बर्षो तक बड़ी कीमत चुकाई उन महान संस्कारो की मानवता के नाते बड़ी त्रासदी देखी है । मगर कहते है समय परिर्वतन शील होता है और एक मर्तवा फिर से मौका हमारे हाथ है । मगर आज मानव जीवन जिस मुकाम पर जा पहुॅचा है वह बड़ा ही डराने बाला है । अफसोस कि आज अधिकांश मानवजीवन अज्ञानता बस अपनी श्रेष्ठता भूल अपने नैसर्गिक आधार को ही आयना दिखाने में अपनी श्रेष्ठता समझने लगा है जो मानव जीवन की बड़ी भूल ही कही जा सकती है । अर्थ और बिलासता के पीछे दौड़ता समृद्ध जीवन लगता है सिर्फ अपना नैसर्गिक स्वभाव ही नही जीवन मे अपनी उपायदेयता भी खोता जा रहा है । और मानवता से अनभिज्ञ जीवन अगुआ बन मानव जीवन की मौजूद कमजोरियो का लाभ उठा स्वयं को योग्य सिद्ध करने का असफल प्रयास करने में ही स्वयं की श्रेष्ठता समझ रहै है जिसे समृद्ध जीवन के साथ घात ही कहा जायेगा । कभी जिस शक्ति को सृजन कल्याण जीवन का संरक्षक सेवक माना गया जिन्ह कभी दैवीय शक्ति तो कभी सम्राट राजा या सत्ता नाम से शुसोभित कर उनके जय जय कार के नारो को बुलंद किया गया शायद उन्ही शक्तियो के अज्ञान , अहंकार का दंश आम जीवन सेकड़ो बर्षो से भोगता रहा है । मगर जब जब यह शक्तियाॅ कल्याण कारी सिद्ध हुई । और मानवता की रक्षा में सफल रही तो इन्ही शक्तियो ने अपना नाम समस्त जीव जगत में पूरे मान , सम्मान के साथ भव्यता और दिव्यता के रूप में दर्ज कराया यह था हमारा श्रेष्ठ जीवन का आधार मगर आज हम तब लज्जित होते है जब हम अपनो के ही बीच कभी नैतिकता तो कभी आचार व्यवहार के चलते स्वयं को लज्जित मेहसूस करते है इसमें दोष न मौजूद जीवन का है न ही उन श्रेष्ठतम संस्कार , संस्कृति का जो महात्वकांक्षाओ के चलते छिन्न भिन्न होती रही और नैतिकता बांझो की भांती बिलखती रही आज हमें गर्व गौरव की अनुभूती होना चाहिए अपनी उस समृद्ध विरासत पर जिसकी श्रेष्ठता सिद्धता के लिये हमें मानवता के बीच पहचाना जाता है । काश यह लक्ष्य हम इस दौर और इस जीवन में पाने मे सफल रहै तो मानव जीेवन के रूप यह मौजूद मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जायेगी । जय स्वराज ।

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