सिंगल विंडो सेवा कल्याण योजना ..............तीरंदाज ?
एक मुश्त कल्याण परियोजना
व्ही.एस. भुल्ले
12 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भैया - मने तो लागे मने एक मुश्त कल्याण परियोजना की घोषणा कर डालू , सिंगल विंडोे सेवा कल्याण योजना को हाथो हाथ लोंच कर डालू जिससे किसी का कल्याण हो या न हो मगर म्हारा और म्हारे बालो का कल्याण तो मने सुनिश्चित लागे । जिस सियासत में वैचारिक आधार टूट रहै हो जीवन मूल सिद्धांत मातम मनाने बैबस मजबूर हो रहै हो ऐसे में गर मने एक मुश्त कल्याण योजना को लांच कर डालू तो म्हारे तो म्हारे सत्ता को लालाहित विघन संतोषि भी बगैर हाथ हिलाये ठिये ठिकाने लग जायेगे और मुई सत्ता भी म्हारे बालो के आगे पैढ़ भरती नजर आयेगी । मने तो लागे 20- 25 का भाव लगा डालू और हाथो हाथ विखरी पढ़ी सत्ता पर कब्जा जमा डालू । इतने पर तो म्हारे को भी भाव मिल जायेगा । मने न लागे इतना कल्याण होने पर सत्ता सिंहाघन और कोई हथिया पायेगा ।
भैयै - मुये चुप कर गर सुन लिया किसी विघन संतोषी ने तो थारी तो थारी म्हारी काठी भी अतिंम संस्कार को तरस जायेगी और दफन कफन होने से पूर्व ही थारी म्हारी राख की एन आई टी लग जायेगी ।
भैया - आखिर तनै कहना का चाबै कै थारे को मालूम कोणी सेवा कल्याण के क्षैत्र में बाढ़ नही सैलाब आया हुआ है । और 1800 से अधिक घोषणाओ का आंकड़ा क्रियान्वयन की आशा में अपना रिकार्ड बना रहा है । मगर घोषणाओ का सैेलाब है जो थमने का नाम ही नही ले रहा । सो मने सोचा गर घोषणाओ से ही काम चल रहा है और योजनाओ पर ही सत्ता का अमृत बरस रहा है तो मने भी एक ऐसी घोषणा कर डालू जिससे टूटने फूटने नई नई पार्टियो के गठन से पूर्व अपने और अपने बालो कि स्थिति मजबूत कर लू मने लागे इतने पर तो चल जायेगी किसी कि बने न बने कम से कम म्हारी और म्हारे बालो की सरकार तो बगैर किसी लाग लपेट अवश्य बन जायेगी । अगर सेवा कल्याण ही इस तंत्र में सर्बोपरि है तो मने न लागे कि म्हारे से बड़ा सेवा कल्याण , परिवार कल्याण का फाॅरमूला और किसी के पास है ।
भैयै - अरे वावलै थारे को मालूम कोणी इस वैचारिक संघर्ष से एक नया वर्ग जन्म ले रहा है जो समृद्ध , शक्ति शाली भी होगा और समाज को नई दिशा दशा देने बाला भी होगा ।
भैया - मने जाड़ू मगर मने न लागे इस पद्धति से समुचे जीव जगत या इस सृजन का कोई कल्याण होने बाला है । क्योकि जब जीवन , जीवन के नैसर्गिक स्वभाव से ही संघर्षरत होगा तो ऐसे में जीवन का कैसे भला होगा । मगर मने तो सिंगल विंडो ही लाउगा और हाथो हाथ सत्ता मौहर बन जीव जगत कल्याण ही नही हर परिवार के कल्याण की 100 प्रतिशत गांरटी के साथ सेवा कल्याण भाव हर जीवन तक पहुॅचा खुद ही महान पुरूषार्थी होने का इतिहास बना स्वयं स्वयं गर्व कर स्वयं को गौरान्वित मेहसूस कराउगा । बोेल भैया कैसी रही । जय जय सियारात । जय स्वराज ।
सुना है , बैसे समझो तो आदर्श राजा तो वही है जो मन से सन्यासी हो जिसे सिंहासन सत्ता का लोभ न हो , वही सच्चा न्याय कर सकता है । जिसे निजि विलास , काम मे असक्ति नही होगी वही एक तपस्वि की भांती दिन रात जनसेवा के कार्य में संलग्न रहेगा।

Comments
Post a Comment