सत्ता का आधार विश्वास , विश्वास का आधार निष्ठा 

स्वार्थ के लिये सत्ता का उपयोग , विरोध कोई नई बात नही 

सृजन में सर्बकल्याण ही समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मूल आधार 

अवसर की निष्ठा ही सच्चा मानव धर्म 

व्ही. एस. भुल्ले 


9 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

कहते है किसी भी जीवन में निष्ठा और जीवन को मिला अवसर जीवन की श्रेष्ठता सिद्ध करने काॅफी होता है । फिर वह जीवन समुचे भूभाग पर मौजूद कोइ्र्र भी जीवन हो नभ , जल से लेकर थल पर मौजूद करोड़ो करोड़ जीवन इस बात के साक्षी है कि उनकी सृजन में नैसर्गिक निष्ठा का रूप जो भी हो मगर मानव जीवन को छोड़ शेष जीवन की निष्ठा और उनके कर्तव्य निर्वहन में कोई नैसर्गिक बदलाव नही । सिर्फ एक मानव जीवन ही ऐसा है जो इस सजृन में अपना ऐ विवेकनी पूर्ण अस्तित्व रखता है । जो अपने विवेक विवेकनी के बल स्वयं के नैसर्गिक स्वभाव के अनुकूल या प्रतिकूल आचरण व्यवहार करता रहा है । जिसने कभी सत्ता का अगुआ वन शेष जीवनो के बीच अपने सर्बकल्याण के नैसर्गिक स्वभाव बस खुद को श्रेष्ठ  सिद्ध करने में स्वयं को सिद्ध किया तो कई अवसरो पर वह असफल अक्षम भी सिद्ध हुआ और जब जब ऐसा हुआ निश्चित ही मानव जीवन कलंकित ही हुआ । मगर आज जब जीवन मे विश्वास का आधार सिद्ध सत्ताये आलोचना अविश्वास का आधार बन रही है या स्वार्थो से सनी सियासत का शिकार हो स्वार्थ के लिये विरोध का आधार बन रही है ऐसे मौजूद सत्ताओ का धर्म ही नही कर्म है कि वह मिले अवसर अनुसार अपनी बगैर किसी संकोच के सर्बकल्याण में सिद्ध करे अगर सत्ता स्वार्थ का शिकार है तो विरोध भी सर्बकल्याण में मुखर हो जिससे सृजन सर्बकल्याण की रक्षा ही नही स्थापित मानव धर्म की सिद्धता सिद्ध हो सके मगर यह तभी संभव है जब मानव धर्म और समृद्ध सृजन में आस्था रखने बाले अपने अपने मानव धर्म का निष्ठापूर्ण निर्वहन कर स्वयं के मानव होने का वह आधार सिद्ध करे जिसके के लिये वह मानव जीवन में है । वरना कहते है अवसर जाते देर नही होती और गबांये अवसरो का दंश पीढ़िया भोगती है । बैहतर हो कि मानव धर्म केे पालन मे मानव जीवन संगठित हो अपने अस्तित्व ही नही समृद्ध आधार का परिचय दे । क्योकि जिस सैलाब का शिकार संस्कारिक रूप मानव जीवन शिकार है उसे पता ही नही की भबिष्य में मानव जीवन और उसकी श्रेष्ठता का आधार पुरूषकृत होने बाला या फिर कलंकित । जय स्वराज । 


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