शिक्षा , स्वास्थ माफियाओं से थर्रायी मानवता


अरबो , खरबो के खुले अनैतिक व्यापार पर चुप्पी शर्मनाक 

निर्दयी सेवा से दहला सभ्य समाज 

कर्म के कुरूप चेहरे से सांसत में संस्कृति , संस्कार 

व्ही.एस. भुल्ले 


10 मई 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.

म.प्र. - बैहतर शिक्षा , स्वास्थ सेवाओ के नाम जिस तरह से समृद्ध जीवन में सन्नाटा पसरा पढ़ा है वह किसी से छिपा नही जिसे किसी ने नियती तो , किसी ने इसे समाज , सियासत और सत्ताओ का मानव जीवन के साथ क्रूर व्यवहार मान एक समृद्ध जीवन को उन श्रेष्ठ जनो के हवाले निढाल छोड़ दिया है । जिन्होने विनाश की संभावनाओ का सामना करने के बजाये उनसे हार मान मौजूद मानव , मानवता को उसके हाॅल पर छोड़ चुप रहने में ही अपने कर्म और धर्म समझ लिया है मगर यह उस समुद्ध जीवन , मानवता , के साथ घात है जिसके के लिये इस महान भूभाग को जाना पहचाना जाता है । आज जिस तरह से समृद्ध मानव , समाज निर्माण के नाम शिक्षा और स्वास्थ सेवा के नाम बड़े बड़े अघोषित रूप से संगठित उद्योग खड़े हो चुके है उसका प्रमाण है कि वैद्यानिक शक्ति प्राप्त संस्थाये भी अब उनके सामने हथियार डाल चुकी प्रमाण आयुषमान जैसी योजनाये , स्वास्थ क्षैत्र में बीमा तो वही गरीब छात्र छात्राओ को शिक्षा हेतु आर्थिक सहयोग , छात्रवृतियां का वितरण मगर अब सत्ता का यह पुरूषार्थ भी माफियाओं के आगे पैड़ भरता नजर आता है । अगर सीधे शब्दो में कहै तो अब तो राजकोष से खर्च होने बाली भारी भरकम राशि भी उॅट के मुॅह में जीरा साबित हो रही है । अगर संस्कार सभ्यता विधान की माने तो बैहतर शिक्षा और स्वास्थ निर्माण का दायित्व उन सत्ताओ का होता है । जो सेवा कल्याण के अस्तित्व में होती है । और उनका आधार भी स्वस्थ शिक्षित समृद्ध मानव और मानवता पर निर्भर होता है । देखा जाये तो सिर्फ म.प्र. ही नही समुचे देश में जो प्रायवेट शिक्षा स्वास्थ संस्थानो का सैलाब आया है और मुॅह मांगी कीमत पर सेवाओ का जो कांरबा चल पड़ा है वह बहुत ही डराने दिल दहला देने बाला है । कई शहर तो अब पूरे के पूरे हब बन चुके है जहां सुनियोजित तरीके से भय दिखा सेवा के नाम मुॅह माॅगा धन बगैर किसी भेदभाव जमकर बसूला जा रहा है अघोषित कमीशनखोरी ऐसी कि प्रमाणो के अभाव में कलफती आत्मा भी शरमा जाये । मगर जबाबदेह और श्रेष्ठजनो की चुप्पी ने मानव जीवन मानवता को वीभत्स बना दिया जो समृद्ध जीवन के साथ घात ही कहा जायेगा। बैहतर हो कि समय रहते हम अपनी पहचान और उन महान संस्कार सभ्यता के लिये पुरूषार्थ करे वरना वह दिन दूर नही जब मानव , मानवता और यह महान भूभाग दम तोड़ एक कलंकित इतिहास बनने पर बैबस मजबूर हो जाये । जय स्वराज । 


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