विवेकनी के अभाव में अभावग्रस्त समृद्ध कौम
वैचारिक महाकुंभ में डुबकी लगाती , लल्लित आस्थाये
श्रेष्ठतंत्र में सिसकती संस्कारविहीन सियासत
अभावग्रस्त आशा अकांक्षाये हुई निराधार
व्ही.एस. भुल्ले
26 मई 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
मातृभूमि जनसेवा , सर्बकल्याण की कोई कितनी ही डीगे ही क्यो न मारे मगर यथार्त यह है कि आज एक समृद्ध समाज वैधानिक तौर पर अभावग्रत घोषित हो विवेकहीन घोषित होने पर बैबस मजबूर है । जिस भूभाग पर 80 करोड़ सस्ते राशन , 50 करोड़ सस्ती या फ्री की स्वास्थ सेवाओ , और 10 करोड़ के करीब फ्री के ईधन , शेष शुद्ध पेयजल के मोहताज हो उसे कैसै समृद्ध खुशहाॅल कहा जा सकता है । आज यह सबसे बड़ा यक्ष सबाल होना चाहिए । यक्ष सबाल तो यह भी होना चाहिए जिस भूभाग ने कड़ी तपस्या परिश्रम पश्चात समुचे विश्व को मानवता मानव धर्म का संदेश अपने पुस्षार्थ के बल दिया वह कैसै किसी भी क्षैत्र में दरिद्र हो सकता है । अगर ऐसा है तो यह उन श्रेष्ठजनो , सभा , परिषदो को लज्जित करने बाली बात है जिनका आधार शुरू से ही समृद्ध , सुस्कृत और श्रेष्ठतम संस्कारो से समृद्ध रहा है । मगर दुर्भाग्य कि हम हजारो बर्ष के संघर्ष , तपस्या , अनगिनत कुर्बानियो के बाबजूद वही के वही खड़े रह अपने आधार को सिर्फ लज्जित ही नही कलंकित करने पर तुले हो सकता है यह अपबाद हो मगर सच क्या है यह तो मौजूद पीढ़ी का धर्म और कर्म है कि वह देखे कि गलती कहां हुई । शायद इस सच को हम जितनी जल्द समझ पाये तो यह मानव जीवन कि सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । जय स्वराज ।।

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