ज्ञान के अभाव में बढ़ता विश्वास का संकट
भ्रमित विवेकनी , निष्ठा ने बिगाड़े हालात
बगैर कर्तव्यबोध असंभव है खुशहाॅली
जीवन को नैसर्गिक निष्ठा की दरकार
व्ही.एस. भुल्ले
28 जुलाई 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
आज जिस तरह से जीवन की समृद्धि खुशहाॅली छिन्न भिन्न हो निस्तनाबूत होने पर उतारू है यह तथ्य समझ रखने बाले किसी भी जीवन से छिपा नही है । मगर मौजूद जीवनो में नैसर्गिक निष्ठाओ का अभाव यह सिद्ध करने काॅफी है कि विवेकिनी निष्ठा किस तरह भ्रमित हो समृद्ध जीवन के बंटाढार पर उतारू है कारण कर्तव्य बोध का अभाव और नैसर्गिक निष्ठा से खुला विद्रोह , कारण साफ है मगर दुर्भाग्य की जीवन अभी यह भी , आज न तो यह मानने तैयार न ही यह समझने तैयार कि समृद्ध जीवन का आधार ही नैसर्गिक निष्ठा में गहरी आस्था है । आज जिस तरह से सुरसा बन विश्वास का संकट आम जीवन के सामने खड़ा है वह किसी बढ़ी तबाही से कम नही क्योकि न तो सर्बकल्याण में ज्ञान बोल रहा है न ही भ्रमित विवेकनी स्वयं स्वार्थ के आगे कुछ समझने सीखने तैयार ऐसे में आवश्यक है कि नैसर्गिक निष्ठा के सहारे इस महासंकट का समाधान खोज मानवता ही नही मानव होने का कर्तव्य आम जीवन निभा पाये तो यह मानव ेजीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । और जिस पर आने बाली पीढ़ी अपने पूर्वजो पर सिर्फ गर्व ही नही गौरव मेहसूस कर सकेगी वरना हजारो बर्षो का इतिहास किससे छिपा है । यह सच हर मानव जीवन को कभी नही भूलना चाहिए । अगर सो कहै कि सृष्टि सृजन में हर जीवन की नैसर्गिक स्वभाव मे निष्ठा ही उसकी ख्.ाुशहाॅली समृद्धि का आधार है और सर्बकल्याण में उसकी निष्ठा उसकी पहचान और मौजूद जीवनो की समृद्धी उसकी श्रेष्ठता का आधार है । बात सिर्फ समझने और उन महान संस्कारो के निर्वहन कि है जिन्होने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर मानव जीवन को श्रेष्ठ गौरव गर्व का उत्तराधिकारी बना हमे उनके वंशज पीढ़ी होने का मान सम्मान दिलाया , अब देखना यह है कि जीवन कब और कैसै जीवन में विश्वास के आधार को समझ अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर विश्वास को अपनी निष्ठा से सिद्ध कर पाता है जिसको आधार मान लाख कुर्बानी त्याग तपस्या के बाबजूद जीवन आज यहा तक पहुॅचा है । जय स्वराज ।।

Comments
Post a Comment