नये खिलाड़ियो की धमक से चरमराई सियासी चैसर 

शिवपुरी में कई खिलाड़ी ताल ठोकने तैयार 

बगाबती तैबरो के बीच बिगड़े सियासी हालात 


वीरेन्द्र भुल्ले 

30 अगस्त 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

शिवपुरी जिस तरह की बगावत शिवपरी की सियासत में अपने वैचारिक आधार को चुनौती दे दिख रही है वह किसी से छिपी नही मगर जिस तरह कि चुप्पी भाजपा काॅग्रेस जैसै बड़े दलो में देखी जा रही है वह किसी से छिपी नही है मगर अब सबाल यह उठता है कि आखिर आज की सियासत को क्या हुआ कि जो विचार कभी किसी भी राजनैतिक दल का मूल आधार होता था और आज जिस आधार पर यह दल खड़े है और आये दिन आम जन को अपने अपने वैचारिक आधार की घुटटी पिला उन्है यह कहते नही भूलते कि उनके नेताओ ने यह दल खड़े करने कितने कठोर परिश्रम के साथ कितनी कुर्बानिया दी है बहरहाॅल यह तो वह दल ही जाने मगर फिलहाॅल जो सियासत सरगर्म है वह यह कि अब बड़े खिलाड़ी भी इस सियासत में कूदने से नही हिचकिचा रहै जिसको लेकर हर दल में चोटी की सियासी उठा पटक शुरू हो चुकी है । अगर हम बात करे तो शिवपुरी मे काॅगे्रस से दावेदारी को लेकर जो सियासी तलबारे खिची है लगता वह अब म्यान में जाने तैयार नही । भले ही लड़ाका कितना ही शक्ति शाली क्यो न हो फिलहाॅल जिन नामो की चर्चा है उनमें पूर्व विधायक गणेश गौतम से लेकर हरिबल्लभ है तो वही नये नामो में राकेश गुत्ता नरेन्द्र जैन भोला तो वह अमित शिवहरे के नामो कि चर्चा भी चल रही है मगर इस बीच अन्दर खाने कि खबर यह भी है कि जोड़तोड़ सही रही तो दो और नाम भी इसमें जुड़ सकते है । मगर जहाॅ तक प्रबल दाबेदारी का सबाल है तो जिस तरह से शिवपुरी विधानसभा क्षैत्र में दीवार लेखन वैनर पोस्टरो की शिरूआत हुई तो शहर के चैराहो पर नरेन्द्र जैन भोला ने कब्जा जमा रखा है । तो वही अमित शिवहरे ने भी कमान संभाल रखी है तो कुछ अभी इस इन्तजार में है कि जब टिकिट मिले तब कुछ किया जाये । ये अलग बात है कि जहां भोला अनुभवी युवा नेता है और बिगत 30 बर्षो से काॅग्रेस की सियासत में तथा कई समाजसेवी संस्थाओ ओर काॅग्रेस में बिभिन्न पदो पर रहै चुके है तो वही अमित अभी युवा नेता है मगर वह हमेशा सक्रिय बने रहते है मगर अन्दर खाने कि खबर यह है कि जब तक टिकटो कि घोषणा नही हो जाती तब तक कुछ भी संभव है जिन और दो नामो पर कुहासा है उसमे एक तो खुलासा हो चुका है तो एक का खुलासा होना शेष है जो दोनो ही कोलारस क्षैत्र से बताये जा रहै मगर जो सुर्खिया आज कल सरगर्म है उन्है देखकर नही लगता कि शिवपुरी का निर्णय इतना आसान रहने बाला है तो वही एक खबर यह भी है कि ऐन वक्त कोई बड़ी बगावत देखने मिले तो किसी को कोई अतिसंयोक्ति नही होनी चाहिए । 


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