लालकिले कि प्राचीर से प्रधानमंत्री का सारगर्वित उदवोधन


भूत , बर्तमान , भबिष्य की सार्थक व्याख्या

दर्द और दवा के साथ समृद्ध जीवन का संदेश 


भृष्टाचार, परिवारवाद , तुष्टिकरण के साथ गुट , गैग , गिरोह भी सर्बकल्याण में बड़ी बाधा 

काश नव विकाश सोच के साथ पुर्निमार्ण का मार्ग भी प्रस्त हो 

आत्मसम्मान के साथ , नैतिक आचरण का संरक्षण अहम 

पहचान से समझौता और विश्वास से घात अक्षम्य 

व्ही.एस.भुल्ले 

16 अगस्त 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

अगर यो कहै कि 77 वे स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संदेश साफ है उससे भूत , बर्तमान से लेकर भबिष्य की जो गर्व गौरवपूर्ण व्याख्या हुई है उसे सुखद ही कहा जायेगा और जो लक्ष्य भबिष्य को लेकर निधार्रित हुये है निश्चित ही गर्व गौरव करने बाले हो सकते है । जिस तरह से देश महान वीर बलिदानियो की त्याग तपस्या को सामने रख उनके दिखाये मार्ग पर देश को आगे ले जाने कि बात हुई है । और विगत बर्षो में सर्बकल्याण में जो लक्ष्य तय किये गये निश्चित ही गर्व करने लायक है फिर बात सुरक्षा को लेकर हो या फिर अन्तराष्टी्रय स्तर पर स्थापित होती देश की पहचान कि या फिर मामला अर्थ व्यवस्था आर्थिक शक्ति को लेकर हो निश्चित ही श्रेष्ठ कार्य हुआ इसमें किसी कोई संदेह नही होना चाहिए । अगर हम बात करे तो जो सेवा सुबिधाये अन्तिम छोर पर खड़े आम आशा अकांक्षाओ तक पहुॅची है निश्चित ही उन्होने भी देश को सोचने समझने का अवसर दिया है । मगर जो सबसे अहम बात कही गई वह भृष्टाचार परिवारवाद तृष्टिकरण की रही जिसने वाक्य मे शोषण किया यह किसी से छिपा नही और जो बात अवसरो को लेकर हुई वह भी सबके सामने है । मगर इन सबके पीधे का एक और अहम मूल कारण है जिसने सिर्फ हर क्षैत्र में शोषण ही नही उसने जीवन समद्धि के साथ हमारे पुरूषार्थ सामथ्र्य को भी पंगु बनाया और वह है स्वार्थवत सर्बकल्याण के नाम गुट , गैग , और गिरोह संस्कृति जिसमें केवल और केवल स्वयं स्वार्थ ही फलता फूलता है । फिर कीमत कुर्बानी जो भी हो यही दर्द अब नासूर बनता जा रहा है । फिर वह व्यक्ति , संस्था , संगठन हो या फिर कोई भी वैचारिक आधार सभी सर्बकल्याण के नाम हाफनी भरते नजर आते है । मगर जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री जी ने किसान मजदूर , अध्यात्म विज्ञान श्रम सेवा के प्रति लाल किले से कृतज्ञता व्यक्त की यह देश को गर्व गौरव करने बाली बात होना चाहिए मगर जब तक हम आत्मसम्मान स्वाभिमान नैतिकता को समृद्ध संरक्षित नही कर लेते तब तक सारी बाते शायद पूर्ण होने संसय पैदा कर सकती मगर जिस रफतार से देश बढ़ रहा है निश्चित देश को संतोष व्यक्त करने बाली बात होना चाहिए और जिस तरह से सभी अहम सबालो के सारगर्वित जबाब उदबोधन में हुये वह भी देश के सराहनीय माने जायेगे आज गर्व गौरव का विषय यह भी है कि देश में एक विश्वास और संस्कार जाग्रत का जो दौर जो शुरू हुआ है निश्चित ही इसके दूरगामी परिणाम काफी सार्थक सिद्ध होने बाले है । निश्चित ही हमारी मौजूद युवा पीढ़ी के पास मरने नही जीने का समय है मगर यह तभी संभव है जब कर्तव्य की श्रेष्ठता सिद्ध हो जो हमारी पहचान भी है और मजबूत जीवन का आधार भी । जैसा की प्रधानमंत्री मंत्री ने अपेक्षा कि मगर जिस तरह से देश की लाल किले कि प्राचीर से कौरोना काल का नाम कई मर्तवा लिया गया और कोरोनाकाल के बाबजूद देश ने जो चमत्कार आर्थिक क्षैत्र ही नही अर्थव्यवस्था के क्षैत्र में कर दिखाया वह काबिले तारीफ है । मगर दुख दर्द और शर्म कि बात यह है कि जब देश करोड़ो करोड़ लोग कोरोना को दहशत जदा थे लोग दम तोेड़ रहै थे शमशान मे स्थान कम पढ़ रहै जबाबदेह अपनी अपनी जबाबदेहियो से मुॅह छिपा रहै थे तब कोरोना वाॅलेन्टियर अस्थाई डाॅक्टर नर्श पैरामैडिकल स्टाफ ने अपनी अपने परिवार कि जान कि परवाह किये बगैर देश और देश बासियो से कंधे से कंधा मिला दिन रात सेवाये दी । और कोरोना जांच टीकाकरण में माहती भूमिका निभाई उन्है धन न होने का हबाला देकर जिस अपमान के साथ हटाया गया यह न तो भारत कि पहचान है न नैतिकता संस्कृति संस्कार क्योकि भारत के लोग भूभाग वह मानवता है जिसने अनादिकाॅल से दुश्मनो को भी सर माथे बैठा उनकी सेवा मदद कि मगर देश कि ही संस्थाये सरकार अपने ही जांबाज नागरिको के साथ इस तरह का आचरण व्यवहार करगी तो निश्चित ही लज्जाजनक कृत्य ही कहा जायेगा । बहरहाॅल हमे 2047 के सपने लक्ष्य को समय से पूर्व हासिल करना होगा जो

हमारा सामथ्र्य भी है और हमारे पुरूषार्थ ने हर क्षैत्र मे सिद्ध भी किया है । और जो हमारे प्रधानमंत्री कि निष्ठा भी है और उनका अटूट विश्वास भी और जो संभव है । जय स्वराज ।। 


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