श्रेष्ठ आस्था विश्वास के साथ अखण्ड अटूट निष्ठा
भृष्टाचार , परिवारबाद , तुष्टिकरण का दर्द
कर्तव्यकाॅल के श्रेष्ठ संकल्प
चरित्र में विश्व मंगल की कामना
आशा अकांक्षाओ पुरूषार्थ सामथ्र्य के शोषण से मुक्ति के संकल्प का वक्त
गैंग गिरोहबन्द गुटीय आस्था विश्वास से घात का डर
संकल्प विचार से बांझ , समृद्ध कल्याण
आत्मसम्मान से विश्वासघात श्रेष्ठ पहचान में बड़ी बाधा
व्ही.एस. भुल्ले
15 अगस्त 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
सहज अवसरो से अनभिज्ञ संकल्प कितने ही मजबूत क्यो न हो और कल्पना कितनी ही श्रेष्ठ क्यो न हो मगर वह भी तब की स्थति में जब सत्ताये समाज , संस्थाओ से लेकर परिवार व्यक्ति तक से पहचान चरित्र निर्माण के साथ सर्बकल्याण का का श्रेष्ठ हो । जिसके लिये वह सिर्फ प्रयासरत ही नही पुरूषार्थ में लिप्त हो मगर यह तब तक संभव नही जब तक कि संकल्प विचार की आढ़ मे सर्बकल्याण के नाम पर गुट , गिरोह , गैग की स्वार्थवत संस्कृति का नाश नही हो जाता । निश्चित ही आज लाल किले की प्राचीर से काफी सारगर्भित बाते हुई संकल्प दौहराये गये तो कुछ पुराने संकल्पो की पूर्णता गर्ब के साथ वह गौरब छड़ो की अनुभूति का भी एहसास कराया गया जिससे आज हमारी पहिचान और चरित्र का भी महिमामण्डल होता है । मगर यह श्रेष्ठ तभी माने जायेगे जब कर्तव्य काल में पूर्ण निष्ठा के साथ हम अपनी खोई पहचान को अपने पुरूषार्थ से हासिल कर विश्व में विश्वास का माहौल तैयार कर पर पाये जो सीधे सीधे आत्मसम्मान से जुड़ा है । क्योकि जीवन जो भी अगर उसके पास उसकी नैसर्गिक पहचान के साथ उसका आत्मसम्मान सुरक्षित नही तो हमेशा उसे अपनी पहचान और चरित्र के संकट से जूझना पढ़ेगा । यह सही है कि भृष्टाचार ,परिवारवाद , तृष्टिकरण ने हमारा बड़ा नुक्सान और आशा अकांक्षाओ सहित पुरूषार्थ सामथ्र्य का बड़ा शोषण किया । तो वही संकल्प , विचारो की आढ़ में पनपे गुट , गैग , गिरोह संस्कृति ने हमारे ताने बाने ही नही हमारी संकल्प और वैचारिक आधार को निस्तनाबूत करने का कार्य किया है जो आज शर्मनाक भी है दर्दनाक भी । यह हमें नही भूलना चाहिए । कि हम उन महान कृतज्ञ परिश्रमी पुरूषार्थियो कि विरासत है जिन्होने हमें समुचे मानव जगत में श्रेष्ठ होने कि पहचान दी और महान संस्कार दिये जिनका आज भी विश्व कायल है । हमंे हमारी उसी महान विरासत को बचाना है । और ऐसे अवसर तलासना है जो हमारी निष्ठा को सिद्ध कर हमंे गर्ब गौरान्वित करने योग्य बनाये तभी हमारे पुरूषार्थ सामथ्र्य की सिद्धता सिद्ध होगी । जय स्वराज ।।

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