काॅग्रेस: म.प्र. में बड़े खेला के आसार
सियासी गढ़ शिवपुरी में , बड़ी बगावत की सरगर्मी
राहुल की भारतजोड़ो को ठिकाने लगाने बालो ने संभाली सियासी कमान से मचा हड़कंप
बड़ी बगावत के बंबडर से मचा कोहराम
वीरेन्द्र भुल्ले
30 अगस्त 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. भोपाल - जिस तरह से म.प्र. में सियासी बाजार में आवतराम जाबतराम का शाॅरूम क्या खुला है लगता है मुब्बत की दुकान अब फीकी सी पढ़ती जा रही है और बगावती तैवर मानो सियासी बाजार के सारे रिकार्ड तोड़ने तैयार हो। ये अलग बात है कि खासी सियासी सरगर्मी अभी सिर्फ सत्ता धारी दल तक ही सीमित नही रही वल्कि उठती सियासी लपटो ने अब विपक्षी दल को भी अपने लपेटे में ले लिया है । मगर इस बीच चर्चाओ मे यह खबर भी खासी सरगर्म कि अब काॅग्रेस में कोई बड़ा खेला होने बाला है जिसका आधार टिकिट घोषणाओ के दौरान ही शायद नंगी आंखो से देखने मिले । मगर अन्दर खाने कि खबर यह है कि जिस तरह राहुल कि भारतजोड़ो यात्रा को ठिये ठिकाने लगा जो अपना अपना सियासी गढ़ नये युवा नये नैतृत्वो से बचाने में सफल रहै वही अब सियासत के अगुवा बन चुके अब वह कौन लोग है यह तो काॅग्रेस का बिषय है या फिर भारतजोड़ो में दिन रात एक कर हजारो कि.मी. की यात्रा करने बाले राहुल ही जाने या फिर वह लोगो जो इस उम्मीद मे 14 दिन म.प्र. में यात्रा को सफल बनाने में लगे रहै या फिर मण्डलंम विधान सभा लोकसभा अध्यक्ष बना काॅगे्रस के आधार को मजबूत बनाने 10 बर्ष तक जुटे रहै या फिर वह जाने जो बनी बनाई सरकार को गुटबाजी के चलते शहीद करबाने में अहम कारण रहै । मगर यह चर्चा आजकल बड़े ही जोर शोर से चल रही है । कि म.प्र. की सियासत का गढ़ बन चुके शिवपुरी जिले में काॅग्रेस के अन्दर कोई बड़ा खेला होने की संभावना सरगर्म है अब कारण जो भी हो मगर जिस तरह से भाजपा छोड़ खासी संख्या में लोग काॅग्रेस में शामिल हुये है । वह भी एक कारण चर्चाओ का आधार बन रहा है तो वही उन लोगो का दर्द भी उभर कर सामने आ रहा है कि उन्है जिन्दगी हो गई भाजपा से लड़ते लड़ते और जब आज उन्है अवसर मिलना था तब सर्बे के नाम या तो उन्है दरकिनार किया जा रहा है या यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि पैमाना जीत है इस लिये जो जीत की गांरन्टी हर मामले में रखता हो उसी को अवसर दिया जायेगा । यह सही है कि जब से सेवा कल्याण को छौड़ कमान सत्ता को मिली है तब से अब सियासत के मायने ही बदल गये है । मगर जिस बड़े की चर्चा सरगर्म है अगर उसकी शुरूआत शिवपुरी से हो तो किसी को अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए । फिलहाॅल तो टिकिट को लेकर शिवपुरी कि किसी न किसी सीट पर सुबह होते ही नई खबर चर्चाओ में झूलने लगती है फिर वह करैरा पिछोर पौहरी हो या फिर कोलारस शिवपुरी नित नये ढंग से नये नये नाम सुख्र्रिया बन रहै है । देखना होगा कि काॅग्रेस इस आहट को कैसै लेती है और सत्ताधारी दल किस तरह बिगड़ते सियासी समीकरणो को संभालती है ।

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