शिवपुरी में बड़े खेला की संभावना 

धमाकेदार हो सकते है विधानसभा चुनाव 

जनाकांक्षाओ ने सम्हाली कमान 


दलो के प्रति फूट रहै है विरोध के स्वर 

जनाक्रोस को धार देते मुददे 

वीरेन्द्र भुल्ले 

8 सितंबर 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

शिवपुरी म.प्र. - 20 लाख की आबादी को समेटे यह जिला यू तो भूभाग कि दृष्टि से अपना अहम ओहदा रखता है जिसके तहत लगभग 5 विधानसभा क्षैत्र आते है जिसमें दो करैरा पौहरी ग्वालियर लोकसभा तो तीन कोलारस शिवपरी पिछोर गुना लोकसभा में आते है जहां प्रमुख रूप से दो ही दलो से लोकसभा या विधानसभा से प्रत्याशी चुनाव जीतते आ रहै है । मगर विगत बर्षो में जिस तरह से सियासी दलो के आधार आस्थाओ में बदलाव देखने को मिला वह भावी सियासत को ठराने बाला भलेे ही हो मगर सियासी मसूमो को हासिल करने बालो के अब कोई खास बात नही रह गयी जिसका परिणाम आज धड़ल्ले से दोनो ही दलो में दल छोड़ने और दूसरे दल का दामन थामने का दौर चल पढ़ा है । जिसकी स्वीकार्यता अब दोनो ही दलो में देखी जा रही है । मगर सबसे धमाकेदार खबर अब आमजन या उस जनाक्रोश के बीच से आ रही है जहा आक्रोस तो सेवा कल्याण को लेकर पनप ही रहा अब सीधे उपेक्षा भी इस जनाक्रोश को धार देने का काम कर रही जिसके चलते कई ऐसे समूह अघोषित संस्थाओ के सक्रिय होने कि चर्चाये आम है जो चाहती है कि जनाकांक्षाओ को दरकिनार कर स्वइच्छाओ को धार देने का कार्य दोनो ही दलो से समर्थन प्राप्त लोगो में देखा गया है । शायद यही कारण है कि दोनो ही प्रमुख राजनैतिक दलो की रणनीति के विरूद्ध एक वर्ग ऐसा भी है जो लामबंद हो चुका है । जो आम मुददो को लेकर चर्चाओ को धार देने में लगा है । जिसमें शुद्ध पेयजल , मुफत शिक्षा , स्वास्थ सेवा , रोजगार , शुद्ध दूध , बिजली को लेकर चर्चाये मुखर है । नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगो का कहना है कि कौन नही जानता कि दो तीन दशक पहले जहा लोगो को शुद्ध पेयजल या समय से पेयजल उपलव्ध हो जाता था बिजली कभी जाती नही थी , स्वास्थ , शिक्षा सरल सस्ती थी और रोजगार का भी अकाल नही था तो फिर विगत तीन चार दशको में ऐसा क्या हुआ कि दोनो ही प्रमुख सियासी दल भाजपा काॅग्रेस की सरकारे तो बनती बिगड़ती रही मगर आमजन कि माली हालत नही सुधर सकी उस पर से भ्रष्टाचार के दंश और कानूनी बाध्यताओ की बढ़ती बाढ़ ने आम जीवन और उसकी आशा अकांक्षाओ को जमीदोष कर उसे मुुफलिसी के साथ भटकने पर बैबस छोड़ दिया है । तो वही दलो ने बजाये सेवा कल्याण के जीतने हारने के अखाड़े मे चुनावो को दबदील कर दिया है । शायद यही कारण है कि आमजन के बीच से जो खबरे आ रही है वह बड़ी ही डराने चैकाने बाली है । जब आम जन से रायशुमारी की गयी तो उनका मानना है कि जब तक विचार आधार की आढ़ में जनाकांक्षाओ से विश्वास घात करने बालो को चुनावो में मत के माध्यम से सबक नही सिखाया जाता तब तक ऐसा ही कुछ चलता रहैगा । फिर वह करेरा पिछोर कोलारस पौहरी शिवपुरी का ही मामला क्यो न हो किसी न किसी चुनाव में दलबदलुओ को जिस तरह की दलो तबज्जो मिली उन्है टिकिट मिली और जीत मिली उसके बाद जो हाल सेवा कल्याण हुआ जिस तरह प्राकृतिक संपदाओ पर माफियाओ ने शिकंजा कसा वह किसी छिपा नही फिर वह रसद राशन , खदान ,रेत शराब माफिया हो या फिर शिक्षा स्वास्थ पेयजल माफिया हो सभी क्षैत्रो में हा हा कार मचा है । मगर आज जब चुनाव सर आ रहै है । तो एक मर्तबा फिर से दावेदारो सेवादारो का झुन्ड उमड़पढ़ा है तो वही प्रमुख दलो यहां भी खूब आबा जाही देखी जा रही है । मगर इस सब के बीच जो लोगो को बिचलित करने बाली बात है वह यह कि जिस जनता को जो सेवादार दल अभी भी भावुक न समझ मान आगे बढ़ रहै है । वहां फिलहाॅल सन्नाटा खिचा पढ़ा अगर सूत्रो कि माने तो 2023 मेे कुछ धमाकेदार परिणाम देखने सुनने मिले तो किसी को अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए क्योकि जिस तरह से लोगो सक्रिय और बिचलित दिखाई दे रहै है उससे साफ है कि कुछ भी हो सकता है । लेकिन एक तरफ जनाक्रोश हिलोरे ले रहा है । तो दूसरी ओर स्वभू भावी दावेदारो के बीच खासा सियासी संग्राम गैग गिरोहबंदी के साथ छिड़ा है । तो ऐसे दावेदारो के आका वैचारिक संगठनात्मक आधारो को जमीदोज कर उन्है हवा देने में लगे है जिससे म.प्र. कि सियासत में पीढ़ी दर पीढ़ी राज बना रहै । उसके लिये जहां जीत और ऐसे सर्बेओ की आढ़ ली जा रही है । जिससे उनकी सियासत पर कोई दाग न हो । और वह अपना सियासी सम्राज्य इसी तरह आगे बढ़ाते रहै । फिर वह भाजपा हो या काॅग्रेस जिस तरह आक्रोश आमजन के साथ सियासी दलो के बीच आमतौर पर देखने सुनने मिल रहा है वह किसी छिपा नही ओर यही कारण है कि कुछ ऐसे लोग और अघोषित संस्थाये सक्रिय दिख रही है जिनकीआस्था सेवा विश्वास और कल्याण में है । फिलहाॅल हर रोज नया नाम और नये दावेदार प्रकट हो रहै है । देखना होगा कि जिस तरह चर्चाये सरगर्म है अगर उन्है बल मिला तो परिणाम क्या होगे यह देखने बाली बात होगी फिलहाॅल तो जिन्है जनमानस पहले ही नकार चुका या जिन्है नकारने का मन बना है वह सेवा कल्याण और आम लोगो कि आबाज उठाने दावेदारी में कितने सफल हो पाते जिनका इतिहास ही स्वयं के विकास कल्याण का रहा है । फिलहाॅल तो चर्चाये है चर्चाओ क्या ? मगर कहते अगर शिवपरी कि पाॅच विधानसभा सीटो पर जो जनाक्रोश का धुंआ उठ रहा है वह किस किस को अपने सियासी आगोस में लेगा या किन किन सियासी महामण्डलेश्वरो कि नैया डुबा उनकी सियासत को ठिये ठिकाने लगाने में कारक सिद्ध होगा यह तो आने बाला भबिष्य ही सिद्ध करेगा ।  


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