चन्द्र के बाद भास्कर को भेदने की तैयारी ..............? तीरंदाज


खेले पर खेला कौन बचेगा अकेला 

व्ही.एस.भुल्ले 

2 सितंबर 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


भैया - चद्र पर पहुॅचने के ढंके के बीच अब भास्कर को भेदने की तैयारी है । बात साधारण नही आसाधारण इसलिये भी है कि अब बगैर पांशे फेके ही चैपढ़ जीतने कि फुल तैयारी है । इधर म्हारे महान प्रदेश में चैसर विछने से ही पूर्व खेले पर खेला हो रहा है कोई बदनाम तो कोई अपनी अपनी गोटी सैट कर सियासी रोटिया सैक रहा है । आखिर कै हुआ म्हारी महान सियासत को जो सत्ता के लिये सियासत में इतना बड़ा खेला हो रहा है । 

भैयै - मुये असगुन चुप कर कै थारे को म्हारा म्हारे वैज्ञानिको का सामथ्र्य के साथ पुरूषार्थ नही दिख रहा है । दुनिया दीवानी है आज म्हारे सामथ्र्य पुरूषार्थ पराक्रम की हमने विश्व में नाम रोशन किया है इसलिये दुनिया को रोशन करने बाले भगवान भास्कर का भेद खोजने का मिशन चुना है बधाई हो थारे को और म्हारे को । 

भैया - मगर यह खेला किस मर्ज की दवा है जो आये दिन म्हारे शांतप्रिय कानो को गुदगुदाये जा रहा है खेल जिसका भी हो कर कोई रहा है और नाम किसी का ला लिया जा रहा है 

भैयै - अरे बाबले इसी का नाम तो राजनीति है । पहले राजधर्म निभाने लोककल्याण के लिये राज सत्ता नीतियाॅ बनाती थी । आज राज स्थापित कर सतत राज स्थापित करने नीतियाॅ बनाई जाती जिसे अब राजनीति कहने लगे सो दलो का आधार आस्था जो भी हो अब तो गैंग गिरोह लिमटेड प्रायवेट लिमिटेडो का लोक और कल्याण के नाम दौर चल पड़ा है । और हर एक का ब्रान्ड बाजार में खूब फलफूल रहा है । कै थारे को मालूम कोणी बड़ी बड़ी छबी चमकाउ कंपनी के साथ गली मोहल्लो में भी छबी चमकाउ कंपनियो का दौर चल पढ़ा है और गैंग गिरोह की भांति यश पराक्रम की ध्वजा लगा भाई लोगो का रथ चक्रबृति बनने इकिल्ले ही दौड़ रहा है । 

भैया - तो क्या 2023 और 2024 अब म्हारी ही होगी या फिर खेला खेला खेल रहै उस्तादो के हाथो अब हम दीन हीनो के कल्याण सेवा की कमान होगी । 

भैयै - म्हारा पराक्रमि इतिहास गबाह है कमान जिसके भी हाथो हो न थारा न ही म्हारे जैसै का कल्याण होने बाला नही क्योकि थारे म्हारे को पर्याप्त पैकैज सस्ता राशन , ईधन , आवास , दवा , सब तो मिल रहा है । सरकार जिसकी भी हो न तो थारा न ही म्हारा हक कहां छिन रहा है । छोड़ म्हारे महान गौवंश का जो हर किसी नेता कि सभा के पहले सड़को पर उतर आती है और इस बैरहम जमाने में स्वयं का हक दिनने के बाबजूद समुची बारिस में मौत से बैपरबाह अपना जीवन हाइबे पर या सड़को पर बिताती है । मगर उन बैजूबानो कि सुनने बाला कोई नही जिस गौवंश कि न जाने कितनी पीढ़ियो ने बगैर किसी स्वार्थ अपने बच्चो के दूध का हक छीन मानव सभ्यता को समृद्ध हस्टपुष्ट बना समृद्धि का मार्ग पृस्त किया आज वही मानव कि अज्ञानता बस दर दर कि ठोकरे खा सड़को पर मर रहा है । मगर उनकी न वह मानव और नही वह राजधर्म सुन रहा है जिनकी पहली जबाबदेही हर जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बनाने कि रही है । 

भैया - मगर काड़ू बोल्या इस बार तो गजब का गजब हो रहा है । सूर्य निशान बालो का नाम ले ले कर हर दिन नया खेला हो रहा है । जो देखो सो म्हारे मोती , सूर्य निशान कि कृतज्ञ निष्ठा पर अपनी राजनैतिक रोटी सेकने टूट रहा है । और खुद को जन लोक सेवक तो आसरा देने बालो महान कह रहा है । सुना है हाथ का साथ देने लेने गाड़ी भरे जा पहुॅचे है । तो 20 बर्ष से खेत रखाने का क्या होगा जिनकी खेत रखाते रखाते चमड़ी काली तो हाथ , पीठ मे धक्के खाते खाते ठाटे पढ़ चुकी है आखिर कै होगा इन बन्चित पीड़ित हाथ बालो का 

भैयै - गर सुनना चाहै तो कान खोल के सुन न तो हाथ बालो के हाथ संगठन खड़ा करने कि लाख मगजमारी कि जिद और न ही भारतजोड़ो यात्रा बालो कि चल रही है और 15 बर्ष जो रखाये रखे हाथ बालो का खेत उनकी पहले ही हाथ बालो के हाथ बिदाई हो चुकी है रहै नये मुख्यतयार तो उनको इस बात में ही बढ़ी खुशी है कि इस मर्तबा सजी सजाई थाली उनके हाथ लग रही है । अब गाड़ी भरे आ जाये या फिर पूरी टे्र्न भर के दरबाजे उतर जाये उनका क्या उन्है तो चिड़िया की आॅख कि तरह कुर्सी दिख रही है । जिन्है आज वह हाथो हाथ थाम रहै है क्या गारंटी है कि उनकी निष्ठा कब तक उनके हाथ के साथ बनी रहैगी । फिलहाॅल तो आने जाने बाले म्हारे महान प्रदेश में आधार आस्था को नर्मदामैया मे वहा खुद को बचाने रैलम पैला मचा रहै है । जो कभी न सूर्य और न ही मोती बालो के रहै सिबाय स्वयं कि आस्था या फिर निष्ठ लोगो कि निष्ठाओ से बंधे रहै वही आ जा रहै है । और नित नये ढंग से अपनी अपनी निष्ठा जता रहै है । अब सियासत का सबसे बड़ा खेला भारतजोड़ो बालो के साथ हो रहा है या फिर मोती बालो के साथ इसमें नया क्या ? क्योकि जो राजा आॅखे बंद और कान खुले रखता है ऐसे राजाओ और जन सेवको के साथ इस तरह खेला होना स्वभाविक है । मगर मनै तो बोल्यू भाया आज कल राजनीति भी बड़ी चोटी की चीज हो ली जो न तो म्हारे बालो के हाथ लग रही न ही , विचार , आस्था , आधार बालो के हाथ , तो फिर सूर्य मोती बाले हो या फिर भारतजोड़ो बाले हो । कहते है राम कि चिड़िया राम का खेत , खा जाओ चिड़िया भर भर पैट । जय स्वराज ।। 

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