शिवपुरी में हो सकता है बड़ा खेला
खतरे में पढ़ सकती है पाॅचो सीट
असंतोष के आकड़ो ने बिगाड़े हालात
दोनो ही खेमो में जबरदस्त कलह
वीरेन्द्र भुल्ले
19 सितंबर 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. मे आजकल सबसे बड़े सियासी गढ़ के रूप में उभरे शिवपरी जिले में खबर है कि बड़ा खेला होने की संभावना है जिससे दोनो ही दलो के चूले हिलना तय हालाकि इसकी शुरूआत तो कई दिनो पूर्व हो चुकी है । मगर अब जो लावा उवल रहा है उसको देखकर यह संभावना स्वतः बन रही है कि अगर सियासी भूकंप आया तो शिवपुरी जिले कि पाॅचो सीटे प्रभावित हो सकती अर्थात किसी न किसी को बड़ा नुकसान आने बाले विधानसभा चुनावो में उठाना पढ़ सकता है । कारण साफ है कि जिस तरह से कार्यकर्ताओ की उपेक्षा कि खबरे आये दिन सुर्खिया बन रही है उससे न तो भाजपा और न ही काॅग्रेस अछूती है । जिसमें सबसे अधिक प्रभावित पौहरी कोलारस शिवपरी करैरा हो सकती है मगर पिछोर सबसे श्योर और पियोर हो ऐसा भी नही क्योकि जिस तरह कि खबरे पिछोर को लेकर सियासी गलियारो में है । वह भी किसी से छिपा नही जहां 2018 में जीत हार का अन्तर मात्र 2800 के लगभग था और जीत लगातार छटबी बार काॅग्रेस की रही जब की भाजपा विगत 19 बर्षो से सरकार में है । और अन्दर की खबर यह है कि इस मर्तवा सत्ता धारी दल की टाॅप प्रायर्टी पर पिछोर है । सो कुछ भी हो सकता है । रहा सबाल कोलारस का तो हाॅल ही में एक बर्तमान विधायक सहित दो जिला पंचायत अघ्यक्ष काॅग्रेस का दामन टिकिट की उम्मीद मे थाम चुके है । तो वही काॅग्रेस से भाजपा में आये पूर्व विधायक आज भी अन्य टिकटार्थियो के साथ अपना ठिया जमाये हुये है । तो वही एक और ताकतवर नेता के विधानसभा में भाग्य अजमाने की खबरे सुखिर्यो में अगर यो कहै कि यहां भी संकट कम नही दोनो ही दलो को तो किसी को कोई अतिसंयोक्ति नही होनी चाहिए । रहा सबाल पौहरी का तो यहा दोनो ही दल भाजपा काॅग्रेस में दावेदारो को लेकर विकट स्थति है । जहां काॅग्रेस को बाहर से आये लोगो पर उम्मीद है तो वही भाजपा में दिन व दिन दावेदारो कि संख्या बढ़ती जा रही है देखा जाये तो यहां से तीन राज्यमंत्री तो वही भाजपा मे बर्षो से उम्मीद लगाये बैठै लोगो कि सख्या कम नही जो समाज सेवा के मार्ग से अपनी पहचान बनाने में सफल रहै । मगर जहां तक काॅग्रेस का सबाल है तो बाहरी के अलावा एक ऐसे कददावन नेता कि चर्चा भी सरगर्म है जिसका नाम ऐन वक्त पर चैकाने बाला हो सकता है तो वही जिस तरह से काॅग्रेस उधार के नैतृत्व से जीतने में सफल रही वहां भी दावेदारो की संख्या कम नही सिर्फ पुरूष ही नही महिलाओ ने भी खासी तादाद में दाबेदारी ठोक रखी है । तो वही भाजपा यह सुनिश्चित नही कर पा रही कि वह इस मर्तवा दांव खेले तो किस पर जहां पूर्व में हार चुके प्रत्याशी है तो वही नये लोगो ने भी मौके का मन बना रखा है । लेकिन जिस तरह कि सियासी संगीने शिवपरी को लेकर गरजने तैयार है उनकी आहट सुन काॅग्रेसी खेमे में सन्नाटा खिचा पढ़ा है और आला नेताओ के भी कान खड़े हो चुके है । जहां तक भाजपा का सबाल है तो वहा सिर्फ एक ही नाम है । और भाजपा विगत एक दशक से लगातार जीत दर्ज कराती आ रही है मगर जीत का आंकड़ा 15000 के पार नही हो। मगर आने जाने को लेकर असंतोष तो यहां भी है । मगर इस सबके बाबजूद सबसे बड़ा खतरा काॅग्रेस में कुछ ज्यादा बढ़ता जा रहा है । जिस तरह की दलीले दोनो ही खेमो मे चल रही है कि पांच बर्ष हमने फर्ष बिछाया और अब मौकाआया तो आया राम गया रामो को तरजीह मिल रही है जो बर्दास्ते काबिल नही अब सही क्या यह तो आने बाला समय तय करेगा मगर इतना तो मौजूदा हालातो के मददेनजर तय है कि 2023 का यह सियासी समर दोनो ही दलो को इतना आसान रहने बाला नही जैसा कि वह मानके चल रहै है । उसका मूल जिस तरह से उपरे स्तरो पर आस्थाये टूट रही है अगर वह निचले स्तर तक जड़े जमाने मेें सफल रही तो परिणाम कुछ भी हो सकते है फिर वह काॅग्रेस हो या फिर भाजपा ।

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