लड़ सकती है श्रीमंत ..................?
छुईमुई की तरह सिकुड़ सकती है, बांछे
खबर से गर्माई शिवपुरी की सियासत
मानो उधार बैठी थी , सियासत
एक खबर से समुचे प्रदेश में कोहराम
वीरेन्द्र भुल्ले
30 सितंबर 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. ग्वालियर जब एक दैनिक समाचार पत्र में यह खबर क्या आई की श्रीमंत स्वास्थ कारणो के चलते शिवपुरी से चुनाव नही लड़ेगी । तब से मानो बर्षो ताक लगाये बैठै माफियाओ कि मानो बांछे खिल पड़ी हो और दबी जुबान यह चर्चा कुछ ज्यादा ही सरगर्म है और सियासी गैंग गिरोहबंदी भी खासी सरगर्म है जिसके लिये कुछ भाई लोगो ने गोल बन्दी भी खासी तेज कर दी है । चुनाव न लड़ने की खबर से पूर्व जिस तरह की गोल बन्दी बिगत 10 बर्षो से चल से शिवपुरी शहर में चल रही थी इससे श्रीमंत कितनी विज्ञ या अनभिज्ञ थी यह तो वही जाने मगर जिस तरह से उन्होने शिवपुरी की सैहत सूरत बदलने की कोसिस की फिर वह चाहै शिवपुरी गुना अब व्यावरा तक का एबी रोड़ फाॅर लेन का मामला हो जब पहली बार इसकी डीपीआर 600 करोड़ की एनएच ने तैयार की और जिसे केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य ंिसधिया के प्रयासो से 3600 करोड़ में तैयार किया गया आज इस फाॅरलेन पर लोग सफर कर रहै है । रहा शिवपुरी की पेयजल समस्या का जब सिर्फ चाॅद पाठा अकेला सोर्स था तब तत्कीन समय इस शहर में श्रीमंत यसोधरा राजे द्वारा प्रयास कर पहले शहर चार दिशाओ में संपबैलो का बनबाया गया फिर सिंध से पेयजल लाने कि डीपीआर साढ़े बाइस करोड़ ,फिर बाबन करोड़ और अन्त में जाकर यह डीपीआर 62 करोड़ और स्वीकृत होने तक यह 82 करोड़ तक जा पहुॅची और अब शहर तक सिन्ध का शुद्ध पेयजल पहुॅच रहा है । इतना ही नही स्वास्थ सेवाओ से लेकर शिक्षण के नये बिषयो के साथ ऐसे संस्थानो कि शुरूआत हुई यहा तक खेल स्टेडियम से लेकर हाॅकी , शूटिंग रेन्ज और खिलाडियो के प्रशिक्षण हेतु संस्थाओ की शुरूआत कर उन्है पूर्ण किया गाॅबो जल ग्रहण मिशन , शहर में नई चैड़ी सडंके , थीम रोड , मंदिरो का जीर्णोउधार , पर्यटन सांस्कृतिक पुरातत्व संपदाओ का जीर्णोउधार और सबसे बड़ा कार्य की माफिया राज नही पनप सका जो देन रातो तक सिर्फ इस उम्मीद में व्यस्थ रहते थे की कैसै वह अपने पैर जमा दोनो हाथो से अपना रूतबा कायम कर पाये । जो गाहै बगाहै उन्ही की चाकचैबंद व्यवस्था में छेद कर अपने मंसूबे पूरे करते रहै । यह इस बात का उल्लेख भी जरूरी हो जाता है जब शिवपुरी के ग्रामीण अंचलो में डकैतो तो शहर में हपता बसूली के लिये हत्यायाओ का दौर चरम पर था और शराब , रसद , वन ,खदान माफियाओ खुलेआम आतंक चलता था । और भूमाफिया ने तो शहर का इतिहास भूगोल ही बदल डाला था । तो वही ठेका माफिया अपनी अपनी तिजोड़ियो को भरने में लगे थे । मगर यह वह बाते है जो लोग जानते तो है मगर यह बाते करने से कतराते है । जब शिकंजा चहुॅओर से कसा तो स्वभाबिक है । कि आखिर एक इंसान कब तक लोकतांत्रिक मजबूरियो के चलते टिक सकता है । मगर आज कल जिस तरह से यह खबर समुचे म.प्र. में सुर्खिया बनी तो चर्चाओ का बाजार गर्म होना भी स्वभाबिक है । मगर एक ऐसे कददाबर नेता के बारे ऐसी खबर आने पर सियासत समर्थक चुप्पी औढ़ ले तो मसला स्वतः ही गंभीर हो जाता है मगर जब तक शिवपुरी के बारे में फैसला नही आ जाता तब तक खबरो का क्या वह तो खबर है । खबर बदल भी सकती है तथा खिली बांछे छुईमुई कि तरह सिकुड़ भी सकती या फिर । यथावत भी रह सकती है मगर शिवपुरी के प्रबुद्ध , आम जन को सबसे अहम बात यह है कि वह यर्थात पर विचार अवश्य करे । क्योकि भड़काउ सियासत का जो नुक्सान शिवपुरी ने विगत बर्षो में झैला है उसकी पुनरावृति अगर होती है तो यह शिवपरी के लिये सुखद नही कहा जा सकता क्योकि लोकतंत्र में समर्पित , सेवा भावी , कल्याण कारी नेता बड़ी मुश्किल से मिलते है । ये अलग बात है कि समर्पित सेवा भावी लोगो कि आढ़ में कुछ लोग आम आशा आकांक्षाओ को विचलित बाधित करते हो इस पर भी विचार अवश्य होना चाहिए कि इतनी भव्य दिव्य विरासत के बाबजूद क्या सेवा कल्याण का भाव और समर्पण कभी प्रभावित हो सकता है जिस पर आज सियासत सरगर्म और खबरे सुर्खिया बन रही है। जय स्वराज ।।

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