वह विराट व्यक्तित्व , यह व्यथित पल
सहज शख्सियत की असहज यादे
वीरेन्द्र भुल्ले
30 सितंबर 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
आज ही का दिन जिसने एक ऐसे विराट व्यक्तित्व शख्सियत को खोया मुझे याद है उनकी वह बैबाक सभा जिसमें उन्होने सार्बजनिक मंच से स्वीकार किया कि बैंक रिणो की माफी सियासी लाभ के लिये उचित नही और इसके दूरगामी परिणाम ठीक नही हो सकते यह आज उन बैंको के लिये सही सिद्ध हुये जो आज या तो डूब चुके है या फिर सरकारो के रहमो करम पर जिंदा है । उनका सहज व्यवहार वह वाक्य में ही इस देश कि ऐसी धरोहर थी जिस पर हर कोई गर्व गौरव मेहसूस कर सकता है । देश हो विदेश हो उन्होने अपनी कृतज्ञता की ऐसी छाप छोड़ी है जिसे आसानी से भूल जाना असंभव ही नही नमुमकिन है । क्या बड़ा क्या छोटा उनके लिये सिर्फ इन्सान थे जिसे वह हमेशा पहले पायदान पर रखते थे न जाने कितनो को उन्होने रंक से इस लोकतंत्र में राजा होने का सौभाग्य दिलाया निश्चित ही वह आज हमारे बीच नही मगर उनकी वह महान कृतज्ञता सहजता अवश्य हमारे साथ और सार्बजनिक जीवन की वह निष्ठा जिसकी अपेक्षा हर मानव जीेवन होती है वह आज भी हमारे साथ है । डकैतो की धांय धाय और ठाय ठाय से प्रभावित ग्वालियर चंबल मे धन कुबेरो के उद्योग जिससे समुचा मालनपुर , बामौर , सिथोली , विजयपुर गुना जगमगा उठे थे । अन्तराष्ट्र्ीय क्रिकेट , हाॅकी मैदान से यह क्षैत्र अपनी पहचान बना चुका था जिसमें नवोदय विधालयो की श्रंखला हबाई अडडा हवाई पटिटयो के जाल शताब्दी रेलो की श्रंखला ,आॅव्हर ब्रिज वो यादगार पुरूषार्थ है जिन्है आज हम मेहसूस करते है । मगर विचलित कर देने बाली बात है आज वह हमारे बीच नही पत्रकार बन्धुओ से सहजता आत्मीय लगाब उनके जीवन के वह कारक रहै कि उन्होने इतनी बड़ी विरासत और हैसीयत को कभी आड़े नही आने दिया किसी भी को गंभीरता सुनना पलट सबाल या तत्काल समाधान यह समझने काॅफी है कि आम जीवन से उनका का कितना जीवंत जुड़ाव था । जो वह थे और जैसा वह सोच जमीन पर उतारने का मादा रखते थे शायद उसका खाली पन आज के सार्बजनिक जीवन और सियासत शायद ही संभव हो सके । लाखो लोगो को परिवार की तरह सहजके रखना उनकी एक अलग खासियत थी । एक मर्तवा उन्होने एक स्वास्थ शिविर के सार्बजनिक मंच से कहा कि वह शिवपुरी के शिविर में ऐसे डाॅक्टरो की टीम लाये है जिन्होने उनके पुत्र श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया की आॅखो का इलाज किया जब उन्होने किसी कारण से गंभीर चोट लगी थी कहने तात्पर्य उनके करने और कहने का जो नजरिया सार्बजनिक जीवन में इतनी बड़ी देश कि शख्सियत होने बाबजूद था वह बड़ा ही आत्मीय और अनुभूति पूर्ण होता था । आज उनकी पुण्यतिथि है । उन्है आत्मीय नमन । जिस सूरज चुनाव चिन्ह पर वह पहला चुनाव लड़े आज उनकी कृतज्ञता पुरूषार्थ भी सूर्य की भांती आम जीवन में प्रकाशमान है ।

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